खाली पड़े है चिकित्सकों के पद
नीमराणा. स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों की उदासीनता के चलते नीमराणा कस्बा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का हाल बेहाल है। आलम ये है कि 30 बेड का अस्पताल है, लेकिन जगह के अभाव में सात बेड का ही अस्पताल चल रहा है। एक वार्ड ही वार्ड में महिला व पुरुष मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। उसी वार्ड में पर्दा लगा कर प्रसव करा दिया जाता है। हालांकि औद्योगिक क्षेत्र में चार करोड़ 25 लाख रुपए की लागत में नई बिल्डिंग बनकर तैयार हो गई, जो अभी चालू नहीं हुई है।
कहने को तो नीमराणा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर पांच चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें एक ही चिकित्सक के भरोसे अस्पताल चल रहा है। इनमें से दो चिकित्सक पीजी के लिए अन्य जगह गए हुए हैं। एक चिकत्सक का तबादला हो गया है, जिसका पद रिक्त है। जूनियर स्त्री रोग विशेषज्ञ महिला पोस्ट 2013 में सृजित हुई तभी से खाली है। इस पोस्ट पर ढाई साल से एक एनिथिया चिकत्सक को लगाया हुआ है, जो वेतन यहां से उठा रहे हैं और ड्यूटी कोटपूतली के सरकारी अस्पताल में दे रहे हैं। ऐसे में अब प्रभारी चिकित्सक ही मरीजों को देखते हैं। स्त्री रोग विशेषज्ञ के अभाव में एएनएम ही प्रसव कराती हैं। सीएचसी में रोज 300 मरीजों की ओपीडी है। दूसरी तरफ यहां फार्मासिस्ट का पद शुरू से ही रिक्त चल रहा है, जिससे अन्य कर्मी ही मरीजों को दवाई देते रहते हैं।
निराश लौट जाते हैं मरीज:
नीमराणा कस्बा की मूल आबादी भले ही आठ हजार के करीब हो, लेकिन इसमें यहां उद्योगों में रोजगार पाकर रह रहे लोगो के लिए कोई पृथक से सरकारी जन सुविधाओं का हॉस्पिटल नहीं है। वे मरीज भी सस्ता इलाज पाने इस अस्पताल का ही सहारा लेते हैं, लेकिन यहां सुविधाए कम मुसीबतें ज्यादा देख मरीज निराश लौट जाते हैं।
निजी अस्पतालों का सहारा :
सीएचसी में इलाज के लिए आने वाले मरीज यहां पूरा इलाज पाने की बजाए चिकित्सकों के अभाव या तो धक्के खाते रहते हैं। या फिर उन्हें रेफर किया जाता है। मरीज कहीं बाहर जाने की बजाए कस्बे में ही खुले निजी अस्पतालों में महंगा इलाज लेने को मजबूर हैं। उन्हें सरकारी योजनाओं की मुफ्त दवा और उपचार दोनों से हाथ धोना पड़ रहा है।
नीमराणा सीएचसी के हालातों के सम्बन्ध में उच्च अधिकारियों को अवगत कराया हुआ है। जल्द ही रिक्त पदों पर चिकित्सक लगा दिए जाएंगे।
डॉ. पीएस मीणा, बीसीएमएचओ, शाहजहांपुर