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Alwar: अलवर पंचायत चुनाव में 141 ने नाम वापस लिए, अब 451 उम्मीदवार मैदान में

अलवर में पंचायती राज चुनाव के दूसरे चरण की तस्वीर अब साफ हो गई है। 141 प्रत्याशियों के नाम वापस लेने के बाद पांच पंचायत समितियों में 451 उम्मीदवार मैदान में रह गए हैं। नाम वापसी के बाद प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह भी आवंटित कर दिए गए हैं।
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Oct 20, 2026
alwar panchayat chunav
representative picture (AI)

अलवर में पंचायती राज चुनाव के द्वितीय चरण के लिए अब 451 उम्मीदवार मैदान में हैं। सोमवार को 141 प्रत्याशियों ने नाम वापस लिए हैं। इसी के साथ प्रमुख राजनीतिक दलों के कुछ उम्मीदवारों को भी राहत मिली है। क्योंकि टिकट न मिलने के कारण कई बागियों ने नामांकन करा दिए थे, जिसमें पार्टियां कुछ को मनाने में कामयाब रहीं। नाम वापसी के बाद चुनाव चिन्ह का आवंटन भी किया गया।

जिला निर्वाचन अधिकारी (पंचायत) डॉ. आर्तिका शुक्ला ने बताया कि द्वितीय चरण के चुनाव में पांच पंचायत समितियां शामिल हैं, जिनमें पंचायत समिति उमरैण, मालाखेड़ा, लक्ष्मणगढ़, राजगढ़ व थानागाजी शामिल हैं। उमरैण पंचायत समिति सदस्य के पद के लिए 28 उम्मीदवारों ने नाम वापस लिए। अब यहां 25 वार्डों से 104 प्रत्याशी चुनाव लड़ेंगे। पंचायत समिति मालाखेड़ा से 25 प्रत्याशियों की नाम वापसी के बाद अब 112 अभ्यर्थी मैदान में हैं। इसी तरह पंचायत समिति लक्ष्मणगढ़ से 36 लोगों ने नाम वापस लिए। अब यहां से 68 अभ्यर्थी चुनावी मैदान में हैं। पंचायत समिति राजगढ़ से 30 अभ्यर्थियों के नाम लेने के बाद 93 उम्मीदवार बचे हैं। पंचायत समिति थानागाजी में 22 अभ्यर्थियों के नाम वापस लेने के बाद 74 अभ्यर्थी चुनाव लड़ेंगे।

आलमारी, गुब्बारा, चारपाई चुनाव चिन्ह मिले

नाम वापसी के बाद चुनाव चिन्ह आवंटित किए गए। राजनीतिक दलों को उन्हीं की पार्टी के चुनाव चिन्ह मिले हैं। बाकी निर्दलीय उम्मीदवारों को गुब्बारा, आलमारी, कोट, सेब, बाल्टी, चारपाई समेत कई चुनाव चिन्ह आवंटित किए गए।

अलवर का चुनावी किस्सा

शाम को भाजपा से पंचायत समिति सदस्य बनीं, सुबह कांग्रेस के टिकट पर प्रधान चुनी गईं

राजनीति में कई ऐसे किस्से होते हैं, जो लंबे समय तक चर्चा में बने रहते हैं। ऐसा ही एक दिलचस्प राजनीतिक घटनाक्रम वर्ष 2015 में देखने को मिला, जब भाजपा के टिकट पर पंचायत समिति सदस्य बनीं मंजू पटेल अगले ही दिन कांग्रेस के टिकट पर पंचायत समिति प्रधान बन गईं थीं। वर्ष 2015 में मंजू पटेल भाजपा के टिकट पर पंचायत समिति सदस्य का चुनाव जीतकर आई थीं। इसके बाद प्रधान पद के चुनाव के समय भाजपा ने ऐन मौके पर उन्हें अपना उम्मीदवार नहीं बनाया। इस घटनाक्रम के बाद कांग्रेस ने राजनीतिक परिस्थितियों का लाभ उठाते हुए मंजू पटेल को प्रधान पद का उम्मीदवार बना दिया। अगले ही दिन सुबह हुए प्रधान पद के चुनाव में मंजू पटेल प्रधान बन गईं। उस समय अलवर में कांग्रेस के जिलाध्यक्ष टीकाराम जूली थे, जबकि भाजपा की ओर से क्षेत्रीय विधायक जयराम जाटव थे। प्रधान पद के चुनाव में हुए इस घटनाक्रम को स्थानीय राजनीति के उन किस्सों में गिना जाता है, जहां टिकट वितरण और ऐन मौके पर लिए गए फैसलों ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए।

Updated on:
20 Oct 2026 12:21 pm
Published on:
20 Oct 2026 12:21 pm