अलवर के पिनान क्षेत्र के मांझवाड़ गांव में वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध कब्जे पर अपना 'पीला पंजा' चलाया है। विभाग की टीम ने भारी जाब्ते के साथ कोर्ट के आदेशों की पालना में वन भूमि पर बने अवैध पक्के मकानों को ध्वस्त कर कीमती जमीन को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त कराया।
वन क्षेत्र की जमीनों पर अवैध रूप से कब्जा करने वालों के खिलाफ वन विभाग ने अब सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। पिनान के मांझवाड़ गांव में वन विभाग की टीम ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए वन खंड 'झांकड़ा' के खसरा नंबर 318 में बने पक्के अवैध निर्माणों को जेसीबी मशीन की मदद से ढहा दिया। विभाग की इस औचक कार्रवाई से इलाके के अतिक्रमणकारियों में हड़कंप मच गया है। दरअसल, यह पूरी कार्रवाई माननीय उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) जयपुर और सहायक वन संरक्षक न्यायालय राजगढ़ के आदेशों की अनुपालना में की गई है।
हाईकोर्ट जयपुर में दायर याचिका (रमेश चंद बनाम सरकार) में पारित आदेश और भू-राजस्व अधिनियम 1956 की धारा 91 के तहत न्यायालय सहायक वन संरक्षक राजगढ़ द्वारा (सरकार बनाम खैराती व श्रीकार) जारी बेदखली आदेशों के बाद विभाग ने यह सख्त कदम उठाया। इन आदेशों के तहत खैराती और श्रीकार (पुत्र हरिया राम मीणा) द्वारा वन विभाग की जमीन पर किए गए अवैध पक्के निर्माण को हटाने का फरमान जारी हुआ था।
आदेश पर अमल करने के लिए वन विभाग ने एक बड़ी संयुक्त टीम का गठन किया। सहायक वन संरक्षक पुष्पेंद्र सिंह और प्रशांत गौड़ के साथ क्षेत्रीय वन अधिकारी राजगढ़ व लक्ष्मणगढ़ के संयुक्त नेतृत्व में टीम मांझवाड़ गांव पहुंची। विरोध की आशंका को देखते हुए टीम के साथ भारी संख्या में वनकर्मी मौजूद थे। मौके पर पहुंचते ही बिना कोई वक्त गंवाए जेसीबी मशीन से पक्के मकानों और बाउंड्रीवॉल को तोड़ना शुरू कर दिया गया। देखते ही देखते करीब 0.0276 हेक्टेयर (लगभग भारी-भरकम रकबा) कीमती वन भूमि को पूरी तरह अतिक्रमण से मुक्त करा लिया गया।
इस बड़ी कार्रवाई को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए कई रेंजों के स्टाफ को एक साथ मैदान में उतारा गया था। टीम में मुख्य रूप से राहुल पोद्दार, रविंद्र सिंह भाटी, प्रियंका मीरवाल, मनीष यादव, राकेश कुमार यादव, मनोज कुमार मीणा और दिलीप सिंह शामिल रहे। इनके अलावा डोरोली, कुंडला, सदर राजगढ़ नाका के स्टाफ सहित राजगढ़, लक्ष्मणगढ़ और थानागाजी रेंज का भारी वन स्टाफ मौके पर मुस्तैद रहा। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में भी वन भूमि पर किसी भी तरह का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसी कार्रवाइयां आगे भी जारी रहेंगी।
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