
अलवर. लोकसभा चुनाव में अलवर जिले ने सत्ताधारी दल के निर्वाचित सांसदों को झोली भर वोट दिए, लेकिन केन्द्रीय मंत्रिमंडल के गठन में अलवर जिला स्थान बना पाने में विफल रहा। अलवर जिला लोकसभा में चार सांसद चुनकर भेजता है, लेकिन मंत्रिमण्डल में इन चारों संसदीय क्षेत्रों में किसी को भी स्थान नहीं मिला। जबकि पिछली दो केन्द्र सरकार में अलवर जिला प्रतिनिधित्व कर चुका है।
लोकसभा चुनाव के गत २३ मई को घोषित परिणाम में अलवर जिले के चारों संसदीय क्षेत्रों में भाजपा के सांसद चुने गए। इनमें लोकसभा क्षेत्र अलवर से महंत बालकनाथ, जयपुर ग्रामीण से राज्यवर्धन सिंह राठौड़, भरतपुर में रंजीता कोली व दौसा संसदीय क्षेत्र से जसकौर मीणा चुने गए। इतना ही नहीं चारों सीटों पर निर्वाचित सांसदों को बड़ी संख्या में वोट मिले, जिससे उनकी जीत का अंतर भी बड़ा रहा।
एक मंत्री बनाने की थी उम्मीद
केन्द्र सरकार में अलवर जिले के चार सांसदों में से कम से कम एक सांसद को मंत्रिमण्डल में जगह मिलने कीे उम्मीद थी। पिछली केन्द्र सरकार में जयपुर ग्रामीण लोकसभा क्षेत्र के सांसद राज्यवर्धन सिंह राठौड़ स्वतंत्र प्रभार के साथ राज्यमंत्री थे। जयपुर ग्रामीण संसदीय क्षेत्र में अलवर जिले का बानसूर विधानसभा क्षेत्र शामिल होने से केन्द्रीय मंत्रिमण्डल में अलवर का प्रतिनिधित्व हो सका। उससे पूर्व वर्ष २००९ से १४ के मध्य अलवर के सांसद जितेन्द्र सिंह को भी स्वतंत्र प्रभार का मंत्रालय दिया गया। पूर्व में जसकौर मीणा भी केन्दीय मंत्रिमंडल में रह चुकी हैं।
अलवर को भी थी उम्मीद
केन्द्रीय मंत्रिमण्डल में अलवर संसदीय क्षेत्र को भी जगह मिलने की उम्मीद थी। अलवर से चुने गए सांसद की उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से नजदीकी होने से लोगों को उम्मीद थी कि सांसद योगी बालकनाथ को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है।