अलवर. शहर के समीपवर्ती एक होटल में दो दिन के मैराथन मंथन में प्रशासन शहरों के संग अभियान में लोगों को दी जाने वाली विभिन्न छूट एवं नियमों में सरलीकरण का खाका तैयार किया गया। शनिवार को भी नगरीय विकास, आवासन मंडल और स्वायत्त शासन विभाग के आला अधिकारी अभियान की रूपरेखा तय करने में जुटे रहे।
अलवर. शहर के समीपवर्ती एक होटल में दो दिन के मैराथन मंथन में प्रशासन शहरों के संग अभियान में लोगों को दी जाने वाली विभिन्न छूट एवं नियमों में सरलीकरण का खाका तैयार किया गया। शनिवार को भी नगरीय विकास, आवासन मंडल और स्वायत्त शासन विभाग के आला अधिकारी अभियान की रूपरेखा तय करने में जुटे रहे। वहीं शुक्रवार की देर रात सवा तीन बजे तक भी अधिकारी मंथन करते रहे। खुद स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल ने भी अधिकारियों की ओर से की गई एक्सरसाइज को बारीकी से समझा।
अधिकारियों के मंथन के दौरान अभियान में दी जाने वाली छूट, नए नियम, पुराने नियमों में सरलीकरण, जारी किए जाने वाले अध्यादेश व आदेशों को अंतिम रूप दिया गया। इन प्रस्तावों को केबिनेट को सौंपा जाएगा।
इस बार अभियान में मंदिर माफी की जमीन तथा राज घरानों की भूमि पर बसे लोगों को पट्टे देने की योजना है। इसके लिए अवधि तय की जाएगी, जिससे पहले बसे परिवारों को ही आवासीय पट्टे दिए जा सकेंगे। हालांकि इस बारे में अंतिम निर्णय केबिनेट की बैठक में होगा।
सरकार का प्रयास ज्यादा से ज्यादा लोगों को मिले पट्टे
इस बार मुख्यमंत्री ने पूरे प्रदेश में 10 लाख पट्टे देने की बात कही है। इसको ध्यान में रखकर यह सभी विभाग एक्सरसाइज कर रहे हैं कि इससे भी अधिक पट्टे किस प्रकार दिए जाएं। इन विभागों के उच्चाधिकारियों का मानना है कि पट्टे देने में किसी प्रकार की कमी नहीं की जाए। पट्टे के लिए आवेदन पत्र को छोटा रखा जाए और मौका देखने की औपचारिकता को समाप्त किया जाए। बैठक में सभी श्रेणियों के हिसाब से पट्टे के कलर को अंतिम रूप दिया गया। मंथन में यूडीएच विभाग के उच्चाधिकारी ही शामिल हो रहे हैं। वहीं स्थानीय स्तर के यूआईटी व स्थानीय निकायों के अधिकारियों को भी दूर रखा गया है।
मंथन के लिए अलवर ही क्यूं चुना
प्रशासन शहरों के संग अभियान की रूपरेखा तय करने के लिए स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल ने अलवर को चुना। इसका कारण है कि जयपुर में स्वयं मंत्री व विभाग के आला अधिकारियों की अन्य कार्यों में व्यस्तता बढ़ जाती है। जबकि अभियान की रूपरेखा तय करने के लिए अधिकारियों को एकांत में मंथन जरूरी था। इस कारण प्रदेश में अंतिम संभाग स्तरीय कार्यशाला का आयोजन में अलवर में किया गया तथा साथ ही तीन दिन का पूरे यूूडीएच विभाग को जयपुर स अलवर बुलाकर अभियान की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया गया।
पट्टों पर अधिक जोर-
इस मंथन बैठकों के दौर के बारे में नगरीय विकास के प्रमुख शासन सचिव कुंजी लाल मीणा ने बताया कि अलवर प्रशासन शहरों की ओर अभियान में पट्टों के सरलीकरण का गवाह बनेगा। इस बार हम 10 लाख से अधिक पट्टे देने की तैयारी कर रहे हैं। पट्टे पर महिला का पहले फोटो लगाया जाएगा जो नवाचार है।