अलवर

रोडवेज के अलवर डिपो को रोज डेढ़ लाख का फटका, सरकार निशाने पर

किसी का टायर तो किसी के पट्टे गायब, नहीं आ रहा सामान
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Updated: 18 Jul 2018, 9:46 AM IST
Alwar roadways is raising 1.5 lakh loss per day
रोडवेज के अलवर डिपो को रोज डेढ़ लाख का फटका, सरकार निशाने पर

अलवर. घाटे से जूझ रही रोडवेज को उसकी कार्यशालाओं में बनी सामान की कमी भी झटका दे रही है। स्थिति ये है कि रोडवेज की किसी कार्यशाला में टायर नहीं हैं तो किसी में पट्टे। इसके चलते लगभग सभी कार्यशालाओं में खराब बसों की संख्या बढ़ती जा रही है। सबसे विकट स्थिति रोडवेज के अलवर आगार की बनी हुई है। रोडवेज के इस अकेले आगार में वर्तमान में 12 बसें छोटी-छोटी कमियों के चलते खराब खड़ी हैं। इनमें 10 मिड्डी बसें है। इसके चलते आगार को रोजाना लगभग डेढ़ लाख रुपए का फटका लग रहा है। रोडवेज अधिकारियों के अनुसार एक बस रोजाना लगभग 10-12 हजार रुपए का राजस्व लाती है। ऐसे में एक साथ 12 बसों के खराब होने से रोडवेज का नफा भी नुकसान में परिवर्तित हो रहा है।

कार्यशाला में नहीं है सामान

रोडवेज की बसों के खराब होकर वर्कशॉप की शोभा बढ़ाने का मुख्य कारण सामान का अभाव है। दरअसल, रोडवेज के अलवर आगार के वर्कशॉप में लम्बे समय से नए सामान की आपूर्ति नहीं हुई है। इसके चलते बसों को दुरुस्त कर रूटों पर चलाना मुश्किल हो रहा है। रोडवेज अधिकारियों के अनुसार बसों में खराबी भी कोई बड़ी नहीं है। किसी का टायर खराब है तो किसी का पट्टा। कोई इंजन में खराबी के कारण खड़ी है। इन कर्मियों को दुरुस्त करने के लिए मुख्यालय से सामान की आपूर्ति नहीं हो रही है। इसका असर डिपो के राजस्व पर पड़ रहा है।

यात्रियों को भी परेशानी

डिपो में खराब खड़ी रोडवेज बसों के कारण जिले के रूटों पर भी यात्री भार को देखते हुए बसों की आवा जाही कम होने से लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। कई रूटों पर एक ही बस के होने से यात्रियों से भरी बस में महिलाओं को परेशानी का सामना करना पडता है।

आगार की 15 में से 10 मिड्डी बसें खराब हैं। दो बड़ी बसें भी खराब पड़ी हैं। इनका सामान वर्कशॉप में नहीं है। इस बारे में कई बार मुख्यालय को अवगत कराया गया है। बसों के खराब होने एवं रूट पर नहीं चलने से राजस्व का नुंकसान होना स्वाभाविक है ।
मनोहरलाल शर्मा, मुख्य प्रबंधक अलवर आगार

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