अलवर जिले में आम जनता को सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ पहुंचाने के लिए शहरी सेवा शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। रामगढ़ के केसरोली गांव में जिला प्रभारी सचिव रवि जैन और कलेक्टर डॉ. आर्तिका शुक्ला ने व्यवस्थाएं जांची, तो वहीं नगर निगम में वन राज्य मंत्री संजय शर्मा ने देसी अंदाज में लोगों को पट्टे बांटे।

अलवर जिले में आम लोगों की समस्याओं के तुरंत निपटारे और उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए प्रशासन पूरी तरह एक्टिव मोड में है। इसी सिलसिले में मंगलवार को जिला प्रभारी सचिव और स्वायत्त शासन विभाग के प्रमुख शासन सचिव रवि जैन रामगढ़ तहसील की ग्राम पंचायत केसरोली पहुंचे। उन्होंने वहां चल रहे ग्रामीण सेवा शिविर का बारीकी से निरीक्षण किया। प्रभारी सचिव रवि जैन ने शिविर में लगे अलग-अलग विभागों के स्टॉल्स का दौरा किया।
उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि आम जनता को योजनाओं का लाभ मिलने में कोई परेशानी तो नहीं आ रही है? अधिकारियों को निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ हर पात्र व्यक्ति तक बिना किसी देरी के और बेहद सुगमता से पहुंचना चाहिए। इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस दौरान उनके साथ जिला कलेक्टर डॉ. आर्तिका शुक्ला भी मौजूद रहीं। अधिकारियों ने शिविर में आए कई लाभार्थियों को विभिन्न सरकारी योजनाओं के चेक और जरूरी दस्तावेज सौंपे, जिससे ग्रामीणों के चेहरे खिल उठे।
दूसरी तरफ, अलवर शहर के नगर निगम कार्यालय में शहरी सेवा शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे वन राज्य मंत्री संजय शर्मा ने लाभार्थियों को उनके मकानों के पट्टे वितरित किए। पट्टा वितरण के दौरान मंत्री का एक अलग ही रूप देखने को मिला।
मंत्री संजय शर्मा ने शिविर में आए आम लोगों से बिल्कुल देसी और ठेठ अंदाज में बातचीत की। उन्होंने लोगों से हंसी-मजाक करते हुए उन्हें सलाह दी कि पट्टा मिलने के बाद इसका रजिस्ट्रेशन (पंजीकरण) जरूर करवा लें। उन्होंने बड़े ही सरल तरीके से बुजुर्गों और महिलाओं को आगे की सरकारी प्रक्रिया भी समझाई। मंत्री के इस अपनेपन वाले व्यवहार की वहां मौजूद लोगों ने काफी तारीफ की।
इस मौके पर नगर निगम आयुक्त ने भी शहर वासियों से अपील की कि वे इन शहरी शिविरों का ज्यादा से ज्यादा फायदा उठाएं। उन्होंने कहा कि जो लोग भी पट्टे या अन्य सरकारी सेवाओं के लिए आवेदन करना चाहते हैं, वे अपने सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ शिविर में आएं ताकि उनके काम को तुरंत पूरा किया जा सके। इन शिविरों से अलवर के शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के लोगों को दफ्तरों के चक्कर काटने से बड़ी राहत मिल रही है।