
अलवर। राजस्थान के पूर्वी सिंहद्वार अलवर में भाजपा के टिकट वितरण ने सबको चौंका दिया है। यहां पहली सूची में जिले की 11 में से मात्र 3 सीटों के नाम तय हुए हैं। इनमें सबसे बड़ी घोषण अलवर शहर को लेकर की गई है। पार्टी ने यहां से खुद जिलाध्यक्ष संजय शर्मा को ही चुनाव में उतारा है। जबकि हाल ही में प्रदेश स्तर पर नीतिगत निर्णय किया गया था कि कोई भी जिलाध्यक्ष चुनाव नहीं लड़ेगा। लगातार दो बार से विधायक रहे बनवारीलाल सिंघल का टिकट काटकर पार्टी ने शर्मा पर विश्वास जताया है। जबकि सिंघल ने 2014 का चुनाव रिकॉर्ड 62 हजार से अधिक मतों से जीता था। तब कांग्रेस प्रत्याशी की जमानत जब्त हुई थी। ऐसा लंबे समय बाद हुआ है कि पार्टी ने अलवर शहर से वैश्य को टिकट नहीं दिया है। जबकि संजय शर्मा को पहली बार टिकट दिया गया है।
रामहेत पर तीसरी बार विश्वास
किशनगढ़बास विधानसभा क्षेत्र से भाजपा ने लगतार तीसरी बार रामहेत सिंह यादव को मैदान में उतारा है। यादव ने यहां से 2008 और 13 के चुनाव जीते थे। जिले का एक मात्र विधानसभा क्षेत्र है जहां से यादव के अलावा पार्टी में किसी और का नाम पैनल में नहीं था। उपचुनाव में भी किशनगढ़बास से पार्टी मुंडावर को छोडकऱ अन्य सीटों की तुलना में सबसे कम वोटों से हारी थी।
मुंडावर से चौधरी की विरासत
मुंडावर विधानसभा क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी ने लगातार दो बार विधायक रहे दिवंगत धर्मपाल चौधरी के परिवार पर पार्टी ने विश्वास किया है। यहां से चौधरी के पुत्र मंजीत चौधरी को प्रत्याशी घोषित किया गया है।
उपचुनाव फैक्टर का असर
अलवर जिले के तीन टिकटों पर गौर करें तो यहां उपचुनाव फैक्टर का असर नजर आ रहा है। अलवर शहर में दो बार से विधायक सिंघल का टिकट काटे जाने को उपचुनाव के परिणामों से जोडकऱ देखा जा रहा है। पार्टी ने अंदरखाने ऐसे संकेत भी दिए थे। अब शेष टिकटों को लेकर भी टिकटार्थियों की धडकऩें बढऩा तय है।
अब कांग्रेस की रणनीति
जिले के तीन विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा ने टिकट की पहले घोषणा की है। अब अलवर शहर में पूर्व केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह खुद चुनाव लड़ेंगे या संजय शर्मा के
- राज्य में घोषित प्रत्याशियों में संगठन के प्रति समर्पित कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देकर अवसर प्रदान किया है। अलवर के तीनों प्रत्याशियों को बधाई देता हूं और विजय की कामना करता हूं। - पंडित धर्मवीर शर्मा, पूर्व जिलाध्यक्ष