
अलवर. शहर में पानी व सीवर की लाइनों के लिए तोड़ी सडक़ों को पूरी तरह दुरुस्त नहीं करने का खमियाजा बराबर जनता को भुगतना पड़ रहा है। सडक़ों के धंसने के डर से अब यूआईटी को सडक़ों की चौड़ाई कम करनी पड़ रही है। सबसे अधिक इस बात का डर है कि पानी व सीवर लाइन वाली जगह आगे बारिश में धंस सकती हैं। सडक़ बनाने के बाद ऐसा हुआ तो यूआईटी की बदनामी होगी। इससे बचने के लिए यूआईटी ने यह रास्ता निकाला है कि सडक़ों की चौड़ाई कुछ कम कर दी जाए।
हसन खां में बना रहे सडक़
इन दिनों यूआईटी की ओर से हसन खां की मुख्य सडक़ बनाने का कार्य तेजी से चल रहा है। कई जगहों से सडक़ों को कहीं एक मीटर तो कहीं दो फीट चौड़ाई कम कर दी। जिसको लेकर यहां के निवासी भी जिम्मेदार अधिकारियों को शिकायत कर रहे हैं कि सडक़ की चौड़ाई घटाई जा रही है। उनको भी यूआईटी के अधिकारी एक ही जवाब दे रहे हैं कि पानी व सीवर की लाइन डालने के बाद सडक़ को पूरी तरह दुरुस्त नहीं किया गया है। कुछ जगहों पर अभी काम ही चल रहा है। जिसे देखते हुए सडक़ की चौड़ाई कम की है। प्रधानाचार्य सत्यवीर यादव ने बताया कि कई जगहों पर सडक़ों की चौड़ाई कम की है।
बारिश में सडक़ धंसने का डर
सडक़ के दोनों तरफ लाइन डली हैं। जब तक पूरी तरह दुरुस्त नहीं होगी तब तक बारिश या थोड़ा बहुत पानी आने पर धंसने का डर रहता है। यही नहीं वाहनों की आवाजाही से भी सडक़ धंस सकती है।
कुछ जगहों पर सडक़ की चौड़ाई कम हुई
यूआईटी की ओर से सडक़ बनाने का कार्य चल रहा है। यह सही है कुछ जगहों पर सडक़ की चौड़ाई कम हुई है। यदि पूरी सडक़ भी बनाते तो उसके तुरंत टूटने का डर रहता। ठेकेदार को काम के अनुसार ही भुगतान किया जाएगा।
एके धींगड़ा, एक्सईएन, यूआईटी अलवर