
अलवर जिला गुटखे की राजधानी का रूप ले चुका है। यहां हर रोज करीब डेढ़ लाख युवा, महिलाएं व अन्य आयु वर्ग के लोग 45 से 50 लाख रुपए का गुटखा गटक जाते हैं। यही कारण है कि जिले में गुटखा जनित बीमारियों से पीडि़तों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है। गुटखे का सेवन करने वालों में 38 साल तक के युवाओं की संख्या ज्यादा है। खास बात यह है कि शहर में एक दर्जन स्थानों पर गुटखे का उत्पादन हो रहा है, फिर भी कानून की पहुंच वहां तक नहीं हो पाई है।
जिला मुख्यालय स्थित अलवर में करीब 7 प्रमुख कम्पनियां अपने ब्रांड के नाम से गुटखे का उत्पादन कर रही हैं। करीब छह से सात ऐसे उत्पादक भी हैं, जो बिना ब्रांड नाम के गुटखे का उत्पादन कर रंग बिरंगे पाउच में बेच रहे हैं। गुटखा व्यवसाय से जुड़े लोगों का मानना है कि अलवर में प्रतिदिन 1200 से 1300 बोरी गुटखा बिकता है। एक बोरी में करीब एक हजार गुटखे के पाउच होते है। इस हिसाब से 13 लाख गुटखे के पाउच की प्रतिदिन बिक्री होती है, यानि इतना गुटखा लोग हर रोज गटख जाते हैं। अलवर में गुटखे की खपत में करीब 75 प्रतिशत से ज्यादा अलवर में तैयार होने वाला स्थानीय ब्रांड का गुटखा है। जिले में रोजाना बिकने वाले गुटखे की कीमत लगाएं तो 45 से 50 लाख रुपए का गुटखा लोग गटख रहे हैं।
बाहर भी हो रहा सप्लाई
अलवर से 150 किलोमीटर दूरी तक गुटखा सप्लाई किया जाता है। अलवर से प्रतिदिन भरतपुर, दौसा, जयपुर, हिण्डौन, महुआ, शाहपुरा,अजमेर, सीकर, दिल्ली, उत्तर प्रदेश व हरियाणा के विभिन्न शहरों में सप्लाई किया जाता है।
देश के हालात
दुकानों पर 90 तरह के तम्बाकू उत्पाद मिलते हैं
5500 नए युवा प्रतिदिन शुरू करते हैं तम्बाकू उत्पादों का सेवन
33 प्रतिशत आबादी तम्बाकू की लत की शिकार
छह लाख लोगों की मौत गुटखे से
50 लाख की मौत सीधे तम्बाकू के प्रयोग से
60 लाख लोगों की मौत का कारण तम्बाकू का सेवन
30 हजार मरीज हर साल तम्बाकू जनित रोगों के बढ़ रहे
देशभर में 20 करोड़ लोग करते हैं तम्बाकू का सेवन