
अलवर जिला परिषद ने 40 से ज्यादा लिपिकों को नियमों के विपरीत जाकर एक करोड़ रुपए का एरियर भुगतान कर दिया गया। इस राशि को वसूलने के लिए आदेश भी जारी किए गए, लेकिन रिकवरी की फाइलें आगे नहीं बढ़ पाई। हैरत तो यह है कि एक लिपिक को एरियर के रूप में करीब दो लाख रुपए भेजे जाने थे, लेकिन उसे चार लाख रुपए तक भेज दिए गए।
जिला परिषद ने 9 सितंबर 2025 को हुई जिला स्थापना समिति (डीईसी) की बैठक में 2013 भर्ती के लिपिकों के 2 साल की सेवा पूरी होने के बाद ही एरियर की गणना को सही माना था, लेकिन इससे पहले ही करीब 40 लिपिकों को नियुक्ति के पहले दिन से ही फिक्स वेतन के स्थान पर नियमित वेतन श्रृंखला को आधार बनाकर एरियर जारी कर दिया गया। मामले का खुलासा तब हुआ, जब राजगढ़ ट्रेजरी ने एक लिपिक के एरियर बिल पर ऑब्जेक्शन लगा दिया था।
इस मामले में प्रत्येक लिपिक को करीब दो लाख रुपए एरियर मिलना था, लेकिन नियमों की गलत व्याख्या और भुगतान प्रक्रिया में हुई गड़बड़ी के कारण कई लिपिकों को करीब चार लाख रुपए तक एरियर का भुगतान कर दिया गया। यानि प्रत्येक कर्मचारी को लगभग दो लाख रुपए अतिरिक्त भुगतान हुआ। 40 से ज्यादा लिपिकों के मामले में यह अतिरिक्त राशि करीब एक करोड़ रुपए तक पहुंचती है।
यह मामला वर्ष 2013 में पंचायतों में संविदा जेटीए, लेखा सहायकों और अन्य कर्मियों के रूप में कार्यरत कर्मचारियों को लिपिक पद पर नियुक्त करने से जुड़ा है। इन पदों के लिए वर्ष 2013 में रिक्तियां निकाली गई थीं, लेकिन विभिन्न कारणों से जॉइनिंग नहीं हो सकी। बाद में वर्ष 2017 में इन कर्मचारियों को लिपिक के रूप में तैनाती दी गई।
नियुक्ति के बाद कर्मचारी न्यायालय पहुंचे और नोशनल लाभ की मांग की। न्यायालय ने नियमानुसार एरियर भुगतान के आदेश दिए। इसके बाद अलवर जिला परिषद को नियमों के अनुसार प्रोबेशन अवधि पूरी होने के बाद यानि 2019 से एरियर का भुगतान करना था, लेकिन वर्ष 2017 से ही एरियर जारी कर दिया गया। वर्ष 2022-23 तक की राशि का भुगतान किया गया। इस तरह करीब दो साल का अतिरिक्त एरियर गलत तरीके से दे दिया गया। यही अतिरिक्त भुगतान अब जिला परिषद के लिए वसूली का बड़ा सिरदर्द बना हुआ है।
यह मामला एसीबी तक पहुंचने के बाद जांच शुरू हुई। संबंधित दस्तावेज मांगे गए और पंचायती राज विभाग के शासन सचिव की ओर से जिला परिषद से रिपोर्ट भी मांगी गई। इसके बाद जिला परिषद में मामले को लेकर जिम्मेदारी तय करने और अतिरिक्त भुगतान की वसूली को लेकर कार्रवाई शुरू हुई।
डीईसी की 9 सितंबर 2025 को हुई बैठक में इस मामले को रखा गया। बैठक के बिंदु संख्या 14 (अ) में पंचायती राज विभाग के 12 अप्रेल 2017 के परिपत्र का हवाला देते हुए स्पष्ट किया गया कि लिपिकों के नकद परिलाभ की गणना और भुगतान दो वर्ष की प्रोबेशन अवधि पूरी होने के बाद से किया जाना था। इसके बावजूद वर्ष 2017 से भुगतान किए जाने के कारण अतिरिक्त राशि का भुगतान हुआ। सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हुआ कि जब सरकार ने वर्ष 2017 में ही 2 साल के बाद एरियर भुगतान के स्पष्ट आदेश दे दिए थे, तो जिला परिषद ने 2023 तक गलत भुगतान क्यों जारी रखा?
मैं इस मामले को चैक करवाकर नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाऊंगा। सरकारी राशि का दुरुपयोग नहीं हो सकता - यक्ष चौधरी, सीईओ, जिला परिषद