अलवर

एक्सप्रेस-वे पर हादसे ने छीना मासूम का संसार… परिवार में बची सिर्फ 2 साल की बच्ची 

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर 14 अप्रैल की सुबह एक ऐसी त्रासदी आई जिसने सुनने वालों की रूह कंपा दी। अलवर जिले के पिनान इंटरचेंज के पास एक निजी स्लीपर कोच बस और ट्रक की भीषण भिड़ंत हो गई।

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Apr 15, 2026
हादसे में क्षतिग्रस्त बस और राजगढ़ थाने में मासूम रिद्धी (फोटो - पत्रिका)

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर 14 अप्रैल की सुबह एक ऐसी त्रासदी आई जिसने सुनने वालों की रूह कंपा दी। अलवर जिले के पिनान इंटरचेंज के पास एक निजी स्लीपर कोच बस और ट्रक की भीषण भिड़ंत हो गई। इस हादसे में 31 यात्री घायल हुए। इस हादसे में सबसे दर्दनाक कहानी उस मासूम की है जिसने एक झटके में अपने माता-पिता और बड़ी बहन को खो दिया।

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बच्ची को बहलाने के लिए खिलौने दिए, चिप्स खिलाए

हादसे के बाद मृतक बस चालक मोनू यादव की दो साल की बेटी रिद्धी को राजगढ़ थाना प्रभारी राजेश मीणा अपनी गोद में लेकर दुलारते रहे। इसके बाद भी बच्ची का रोना बंद नहीं हुआ तो उन्होंने उसे अपने मोबाइल पर कार्टून फिल्म दिखाई। इसके अलावा बच्ची को बहलाने के लिए खिलौने दिए। उसे चिप्स खिलाए। कोल्ड ड्रिंक व पानी पिलाया। दोपहर बाद बच्ची को उसके मामा राजगढ़ से आगरा ले गए। परिजनों के मुताबिक बच्ची के पीछे घर में कोई नहीं है। वृद्ध बाबा है। परिजनों के आने से पहले ही मामा बच्ची को आगरा ले गए।


केबिन में सिमट गई खुशियां

उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद निवासी मोनू यादव (32) अपनी निजी बस लेकर यात्रियों के साथ उज्जैन गए थे। उनके साथ उनकी पत्नी रीना (31), आठ साल की बेटी शक्ति उर्फ डॉली और दो साल की नन्ही रिद्धी भी थी। महाकाल के दर्शन के बाद पूरा परिवार बेहद खुश था और रास्ते भर यादें संजोते हुए लौट रहा था। मोनू ने अपने परिवार को बस के केबिन में ही अपने साथ बैठा रखा था, लेकिन यही केबिन उनके लिए काल बन गया।

एक पल में सब खत्म

हादसे का चश्मदीद यात्री अनिल कुमार ने बताया कि चालक मोनू को बार-बार नींद के झोंके आ रहे थे। यात्रियों ने उन्हें बस रोककर आराम करने की सलाह भी दी, लेकिन उन्होंने सफर जारी रखा। सुबह करीब 5 बजे पिनान पुलिया पार करते समय बस आगे चल रहे ट्रक में जा घुसी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि केबिन के परखच्चे उड़ गए। मौके पर ही मोनू, रीना और मासूम डॉली की मौत हो गई।


परिवार में सिर्फ 2 साल की मासूम रिद्धी ही बची

दो साल की रिद्धी इस मौत के तांडव के बीच सुरक्षित बच गई। पुलिस जब उसे थाने ले गई, तो दृश्य भावुक करने वाला था। वह नन्हीं बच्ची जिसे 'मौत' शब्द का अर्थ तक नहीं पता, कभी खिलौनों से खेलती तो कभी अनजान चेहरों में अपनी मां को तलाशती। उसे क्या पता कि अब उसकी दीदी और मम्मी-पापा कभी वापस नहीं आएंगे। महाकाल के साथ खींची गई वो आखिरी सेल्फी अब रिद्धी के पास उसके परिवार की अंतिम निशानी बनकर रह गई है।

Published on:
15 Apr 2026 12:19 pm
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