
अलवर. जिले की गोशालाओं में ज्यादा संख्या में गोवंश दर्शाने से पशुपालन विभाग की ङ्क्षचता बढ़ गई। विभाग को आशंका है कि कुछ गोशालाओं की ओर से फर्जी आंकडों पेश किए गए हैं। विभाग अब गोवंश की सच्चाई जानने के लिए जिले की गोशालाओं का फिर से सर्वे करवाएगा। गोशालाओं में इस साल 20 प्रतिशत से ज्यादा गोवंश की वृद्धि दर्शायी गई है। इस कारण पशुपालन विभाग ने फिलहाल जिले की 6 गोशालाओं को दी जाने वाली सहायता की दूसरी किश्त रोक दी है। इससे गोशालाओं में पल रहे पशुधन को चारे पानी का संकट भी खड़ा हो सकता है। गौरतलब है कि गोशालाओं में गोतस्करी से छुडवाए गए गोवंश, पालन नहीं कर पाने पशुपालकों के गोवंश, सडक़ों पर लावारिस मिले गोवंश को रखा जाता है। इनका चारा पानी का खर्चा सरकार देती है। छोटे पशुओं को 20 रुपए प्रतिदिन व बड़े पशुओं के लिए 40 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से राशि दी जाती है।
पहले चरण में मिला 8 करोड़ से ज्यादा का अनुदान
गोशालाओं को साल में दो बार सरकार की ओर से अनुदान दिया जाता है, जिससे गोशालाओं में पशुधन के लिए चारे पानी की सुविधा रहे। इससे पहले 6 महीने में प्रथम चरण का अनुदान 8 करोड़ 22 लाख 81 हजार 600 रुपए दिया है। यह बजट अप्रेल, मई, जून व जुलाई माह का है। पहले चरण में 18 हजार 958 गोवंश को अनुदान दिया है। इसमें बडे पशुओं की संख्या 15326 और छोटे पशुओं की संख्या 3832 है।
पहले चरण में मिले 20 हजार 413 पशु
पांच माह के लिए पशुगणना की जानी है। इसमें नवंबर, दिसंबर, जनवरी, फरवरी व मार्च का अनुदान दिया जाना है। इसकी पशुगणना करवाई गई थी। इसमें गोवंश की संख्या 20 हजार 413 आई थी। इनमें 16444 बड़े जानवर व छोटे जानवर 3969 है।
6 गोशालाओं में फिर से होगी गणना
पशु पालन विभाग की गणना के नियमों के अनुसार पिछले साल तक दस प्रतिशत की संख्या में बढ़ोतरी होने पर बजट दिया जाता था। इस साल से सरकार ने 20 प्रतिशत अधिक संख्या होने पर अनुदान की घोषणा की है। लेकिन गणना के दौरान जिले की छह गोशालाओं में 20 प्रतिशत से ज्यादा गोवंश मिला है। इन गोशालाओं का दोबारा से भौतिक सत्यापन करवाया जाएगा।
जिले की फैक्ट फाइल
गोशालाओं की संख्या- 58
अनुदान लेने वाली गोशालाएं- 33
कितने गोवंश को मिला अनुदान- 18 हजार 958
जिले की छह गोशालाओं में पशुधन 20 प्रतिशत से ज्यादा मिला है। इनको दिया जाने वाला बजट रोक दिया गया है। इन गोशालाओं में फिर से गणना करवाई जाएगी। जून माह तक गणना पूरी होगी। जिसे कलक्टर के समक्ष पेश किया जाएगा। इसके बाद ही बजट पेश होगा। नियम के अनुसार गोशालाओं में 20 प्रतिशत की वृद्धि होने पर ही बजट दिया जाता है।
-डा. राजेश गुप्ता, उपनिदेशक, बहुउद्देेशीय पशु चिकित्सालय, भवानी तोप, अलवर।