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Alwar News: अलवर के बड़ा गांव में महारुद्र यज्ञ शुरू, कलश यात्रा में ऊंट के डांस ने जीता दिल

अलवर के बड़ा गांव नेथला गंडराला में शुक्रवार से श्रीमद् भागवत कथा, शिव पुराण और 151 कुंडीय महारुद्र यज्ञ का शंखनाद हो गया है। आयोजन से पहले निकली भव्य कलश यात्रा में एक ऊंट ने चारपाई पर ऐसा अनोखा नृत्य किया कि देखने वाले दंग रह गए।
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shrimad bhagwat katha gandrala

चारपाई पर नृत्य करता ऊंट (फोटो - पत्रिका)

राजस्थान के अलवर जिले के बड़ा गांव नेथला गंडराला में भक्ति और आस्था का एक अनोखा रंग देखने को मिल रहा है। यहां शुक्रवार से भव्य श्रीमद् भागवत कथा, शिव पुराण और 151 कुंडीय महारुद्र यज्ञ की शुरुआत बेहद धूमधाम के साथ हुई। इस बड़े धार्मिक अनुष्ठान को लेकर पूरे क्षेत्र में भारी उत्साह है, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा उस भव्य कलश शोभायात्रा की हो रही है, जिसने हर किसी का मन मोह लिया।

चारपाई के ऊपर चढ़कर किया नृत्य

कथा और यज्ञ की शुरुआत से पहले एक भव्य कलश यात्रा निकाली गई। यह यात्रा हल्दीना स्थित रामदेव बाबा मंदिर और बड़ा गांव के माता मंदिर से शुरू होकर कथा स्थल तक पहुंची। इस शोभायात्रा का सबसे बड़ा आकर्षण एक ऊंट रहा, जिसने चारपाई (खाट) के ऊपर चढ़कर नृत्य पेश किया। ऊंट के इस करतब और बैलेंस को देखकर वहां मौजूद श्रद्धालु हैरान रह गए और लोगों ने इस पल को अपने कैमरों में कैद कर लिया।


1100 महिलाओं ने उठाए कलश

आयोजक ओम दास महाराज ने बताया कि इस कलश यात्रा को बहुत ही भव्य और ऐतिहासिक रूप दिया गया। यात्रा के लवाजमे में 10 सजे-धजे रथ, पांच डीजे, दो बैंड बाजे, एक हाथी, ऊंट, घोड़े और देवी-देवताओं की सुंदर 20 धार्मिक झांकियां शामिल रहीं। भक्ति गीतों की धुन पर झूमते श्रद्धालुओं के साथ 1100 महिलाएं अपने सिर पर मंगल कलश धारण कर चल रही थीं। इसके साथ ही 151 ध्वज रक्षक भगवा ध्वज लेकर शोभायात्रा की अगुवाई कर रहे थे, जिससे पूरा माहौल भक्तिमय हो गया।

ज्योतिषीय गणना से बनी 11 हजार फीट की यज्ञशाला

कथा स्थल के पास ही इस विशाल 151 कुंडीय महारुद्र यज्ञ के लिए एक बेहद खूबसूरत और भव्य यज्ञशाला तैयार की गई है। यज्ञशाला के मुख्य शिल्पकार हनुमान प्रसाद जांगिड़ ने जानकारी दी कि इसका कुल क्षेत्रफल लगभग 11 हजार वर्ग फुट है। सबसे खास बात यह है कि यहां नवग्रहों की शांति के लिए अलग-अलग हवन कुंड बनाए गए हैं।

इन कुंडों का निर्माण पूरी तरह से ज्योतिषीय गणना के आधार पर किया गया है, जिसमें अर्द्धचंद्राकार, त्रिभुजाकार और चतुर्भुज (चौकोर) जैसी अलग-अलग आकृतियों के हवन कुंड शामिल हैं। इस महाआयोजन में हिस्सा लेने वाले श्रद्धालुओं के आराम का भी पूरा ध्यान रखा गया है। कथा के लिए एक विशाल वाटरप्रूफ डोम (पंडाल) बनाया गया है, जहां एक साथ 3 से 4 हजार श्रद्धालु बैठकर कथा का आनंद ले सकेंगे। आज से शुरू हुआ यह धार्मिक उत्सव आने वाले दिनों में क्षेत्र में आकर्षण का केंद्र बना रहेगा।