17 जुलाई 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

NEET UG 2026 result : राजस्थान में सैनिक के बेटे ने किया कमाल, 720 में से मिले 705 अंक, जानें सफलता का राज

NEET UG 2026 result : कहते हैं कि अगर हौसलों में उड़ान हो और गुरुओं के मार्गदर्शन पर अडिग विश्वास, तो सफलता की हर मंजिल को चूमा जा सकता है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है अलवर के गाडुवास गांव के लाल गौरव सिंह ने।
2 min read
Google source verification

अलवर

image

kamlesh sharma

Jul 17, 2026

gaurav-singh

Re-NEET UG 2026 Result: gaurav singh-Photo पत्रिका नेटवर्क

NEET UG 2026 result : अलवर। कहते हैं कि अगर हौसलों में उड़ान हो और गुरुओं के मार्गदर्शन पर अडिग विश्वास, तो सफलता की हर मंजिल को चूमा जा सकता है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है अलवर के गाडुवास गांव के लाल गौरव सिंह ने। गौरव ने देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट (NEET UG) में ऑल इंडिया 9वीं रैंक (AIR-9) हासिल कर न केवल अपने माता-पिता, बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन किया है। गौरव ने 720 में से 705 अंक प्राप्त किए। बता दें कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने गुरुवार रात मेडिकल प्रवेश परीक्षा री-नीट यूजी-2026 का परिणाम घोषित कर दिया। परीक्षा 21 जून को देशभर में दोबारा आयोजित की गई थी।

'शिक्षकों की हर सलाह मानी, उसी ने मिली सफलता'

अपनी इस सफलता का श्रेय गौरव अपने शिक्षकों और अपनी मां को देते हैं। गौरव का कहना है कि उनकी सफलता का मंत्र गुरुओं की हर सलाह का ईमानदारी से पालन करना रहा। शिक्षकों ने जो भी दिशा-निर्देश दिए, उन्होंने उन्हें कभी नजरअंदाज नहीं किया। गौरव पिछले सात वर्षों से कोटा में रहकर परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। बड़ी बहन अनुजा भी यहीं से तैयारी कर वर्तमान में ईएसआइसी मेडिकल कॉलेज, अलवर से एमबीबीएस कर रही है, जिनसे लगातार प्रेरणा मिली। गौरव ने कहा कि मां सीमा देवी मेरे और बहन के साथ कोटा में रहकर हमारी पढ़ाई का पूरा ध्यान रखती थीं। उन्होंने हर परिस्थिति में हमारा हौसला बढ़ाया।

प्रतिदिन 7-8 घंटे सेल्फ स्टडी और गलतियों से सीखा

गौरव ने बताया कि क्लास के अलावा वे रोजाना 7 से 8 घंटे की सेल्फ स्टडी करते थे। उनका मानना है कि सिर्फ टेस्ट देना काफी नहीं है, बल्कि प्रत्येक टेस्ट के बाद अपनी कमियों और गलतियों का विश्लेषण करना और उन्हें दोबारा न दोहराना ही सफलता की असली कुंजी है। उन्होंने स्मार्टफोन का केवल पढ़ाई के लिए उपयोग किया और समय का दुरुपयोग नहीं होने दिया।

फौजी पिता के अनुशासन और डॉक्टर बहन से मिली प्रेरणा

गौरव के पिता राजेश कुमार भारतीय सेना में हैं। बड़ी बहन अनुजा भी कोटा से ही तैयारी कर वर्तमान में ईएसआईसी (ESIC) मेडिकल कॉलेज, अलवर से एमबीबीएस कर रही हैं। गौरव बताते हैं कि दीदी को डॉक्टर बनते देखना उनके लिए सबसे बड़ी प्रेरणा रहा, जिसने उन्हें लगातार आगे बढ़ने की ऊर्जा दी।

शुरू से ही रहे है मेधावी

गौरव स्कूली शिक्षा से ही मेधावी छात्र रहे हैं। उन्होंने 10वीं कक्षा में 92 प्रतिशत और 12वीं कक्षा में 90 प्रतिशत अंक हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था। उनकी इस सफलता पर उनके गांव गाडुवास में जश्न का माहौल है।