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Siddhartha Saxena : राजस्थान के सिद्धार्थ सक्सेना कौन हैं ​जिसने एक दिन में कमाए 77 करोड़ रुपए, हर जगह हो रही है चर्चा

Siddhartha Saxena : राजस्थान के अलवर के सिद्धार्थ सक्सेना इन दिनों चर्चाओं में है। जानकर हैरान रह जाएंगे कि सिद्धार्थ ने एक दिन में 77 करोड़ रुपए कमाए हैं। जानें सिद्धार्थ सक्सेना के बारे में।
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अलवर

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Sanjay Kumar Srivastava

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Updated: 17 Jul 2026, 11:40 AM IST

Rajasthan Alwar Siddharth Saxena who earned Rs 77 crore in a day

Siddhartha Saxena : अलवर के साधारण परिवार में जन्मे सिद्धार्थ सक्सेना। फोटो पत्रिका

Siddhartha Saxena : कहते हैं सपने वो नहीं जो हम सोते हुए देखते हैं, सपने वो है जो हमें सोने नहीं देते। अलवर के साधारण परिवार में जन्मे सिद्धार्थ सक्सेना (26 वर्ष) की कहानी ऐसी ही है। आज दुनिया में एआइ का डंका बज रहा है, तब अलवर का यह युवक सिलीकॉन वैली (अमरीका) में तकनीक की नई इबारत लिख रहा है। सिद्धार्थ कहते हैं, 'मैंने महज एक ही दिन में 8 मिलियन डॉलर (करीब 77 करोड़ रुपए) की डील फ्रैंक की है।' इस सफलता ने उन्हें देश के सबसे चमकते युवा टेक उद्यमियों की कतार में खड़ा कर दिया है।

अलवर के सिद्धार्थ सक्सेना ने आइआइटी कानपुर से डिग्री पूरी करने के बाद बेंगलूरु की 'एनवेस्टनेट योदली' में कोडिंग सीखी। इसके बाद फिनलैंड व कनाडा में अनुभव बटोरा। इसी दम पर उन्होंने 2022 में आइआइटी बैचमेट्स प्रग्युश राय व शिरशेंदू सरकार के साथ मर्लिन एआइ स्टार्टअप की नींव रखी, जो कामकाजी पेशेवरों की कार्यक्षमता बढ़ाने वाला क्रोम एक्सटेंशन है। आज उनके स्टार्टअप की मार्केट वैल्यू 50 मिलियन डॉलर (करीब 415 करोड़ रुपए) पार कर चुकी है।

लॉटरी नहीं, बल्कि स्टार्टअप में हिस्सा बेचने से मिली राशि

सिद्धार्थ का दावा है कि यह कमाई सैलरी या लॉटरी से नहीं, बल्कि स्टार्टअप की हिस्सेदारी बेचने से हुई। उनके एआइ स्टार्टअप 'मर्लिन' की मार्केट वैल्यू 415 करोड़ रुपए के पार पहुंच गई, तब वैश्विक निवेशकों के साथ एक बड़ी फंडिंग और शेयर्स ट्रांसफर डील हुई। इसमें सिद्धार्थ ने व्यक्तिगत हिस्सेदारी के बदले एक ही दिन में 8 मिलियन डॉलर (करीब 77 करोड़ रुपए) की लिक्विड वैल्यू हासिल की। स्टार्टअप की दुनिया में इसे 'फाउंडर सेकेंडरी सेल' कहा जाता है।

सिद्धार्थ सक्सेना थाइन (Thine) नाम के एक अन्य एआई उद्यम के सह-संस्थापक भी हैं। इसका मुख्यालय पालो ऑल्टो (कैलिफोर्निया, अमेरिका) में है। सिद्धार्थ ये मानते हैं कि IIT कानपुर के कंप्यूटर साइंस कोर्स में एडमिशन पाना बेहद कठिन होता है जिसके लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। ये हार्वर्ड में एडमिशन से 20 गुना कठिन है। कानपुर में पढ़ाई के दौरान ही उनकी रुचि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग में हुई जिसने आगे चलकर उनके करियर की दिशा तय की।

सफल उद्यमी बनने के लिए सही सोच भी जरूरी

सक्सेना का मानना है कि सफल उद्यमी बनने के लिए सिर्फ तकनीक ही नहीं, बल्कि सही सोच भी जरूरी है। उनके अनुसार, लोगों को सीमित सोच छोड़कर बड़े अवसरों को देखने और समझदारी से जोखिम लेने की मानसिकता अपनानी चाहिए।