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सरिस्का बाघ रेस्क्यू मामला: 150 ग्रामीणों पर FIR के खिलाफ गुस्सा, कलेक्टर के नाम सौंपा ज्ञापन

नारायणपुर उपखंड के तुलसीवाला गांव में बाघ के शावक के रेस्क्यू के दौरान वन विभाग की टीम पर हुए हमले का मामला गरमा गया है। विभाग द्वारा 150 ग्रामीणों पर दर्ज मुकदमे को झूठा बताते हुए ग्रामीणों ने शुक्रवार को जिला कलेक्टर के नाम उपखंड अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।
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ज्ञापन देते ग्रामीण (फोटो - पत्रिका)

कोटपूतली-बहरोड़ में सरिस्का से सटे नारायणपुर उपखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत बामनवास कांकड़ के तुलसीवाला गांव में 15 जुलाई को हुए बाघ (शावक) रेस्क्यू विवाद ने अब बड़ा रूप ले लिया है। वन विभाग की ओर से गांव के करीब 150 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराए जाने के विरोध में शुक्रवार को ग्रामीण लामबंद हो गए। ग्रामीणों ने प्रशासक गणेश जाट और पूर्व सरपंच प्रतिनिधि मुकेश गुर्जर के नेतृत्व में उपखंड मुख्यालय पहुंचकर जिला कलेक्टर के नाम उपखंड अधिकारी (SDM) दिनेश शर्मा को एक ज्ञापन सौंपा।

अफवाह फैलने से बिगड़ा माहौल

दरअसल, 15 जुलाई को तुलसीवाला के आबादी क्षेत्र में एक बाघ का शावक घुस गया था। रेस्क्यू के दौरान वहां माहौल बिगड़ गया और वन विभाग की टीम पर हमला हो गया, जिसमें तालवृक्ष रेंजर त्रिलोक प्रजापत और सरिस्का सीसीएल टीम के एक दर्जन से अधिक कर्मचारी घायल हो गए थे। इस मामले में रेंजर की रिपोर्ट पर पुलिस ने मोहरसिंह, नरसी, लीलाराम, दिलीप, किल्लू और खुशीराम गुर्जर सहित 6 लोगों को नामजद करते हुए 100 से 150 अन्य ग्रामीणों को आरोपी बनाया गया है।


वन विभाग की लापरवाही से बढ़ा विवाद, फैली बच्चे की मौत की अफवाह

कलेक्टर को भेजे ज्ञापन में ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि यह पूरी घटना वन विभाग की नाकामी और लापरवाही का नतीजा है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में बाघ घुसने की सूचना के बाद भी वन विभाग की टीम बहुत देरी से पहुंची। रेस्क्यू ऑपरेशन में ढिलाई के कारण आसपास के गांवों से भारी भीड़ जमा हो गई।

इसी बीच बाघ ने एक ग्रामीण पर हमला कर उसे घायल कर दिया। इस हमले के बाद मौके पर यह अफवाह फैल गई कि बाघ ने एक बच्चे को मार डाला है। अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर घबराए महिला और पुरुष मौके पर इकट्ठा हो गए। ग्रामीणों का दावा है कि वन विभाग अपनी नाकामी छुपाने के लिए दुर्भावनापूर्ण तरीके से निर्दोष ग्रामीणों पर झूठा मुकदमा दर्ज करवा रहा है।

पहले भी मवेशियों पर कर चुका है हमला

ग्रामीणों ने बताया कि यह बाघ पहले भी गांव में आतंक मचा चुका है। 29 जून को इस बाघ ने तुलसीवाला गांव में ग्रामीणों की भैंसों पर हमला किया था, जिसमें एक भैंस की मौत हो गई थी और तीन घायल हुई थीं। तब भी तालवृक्ष रेंज और उपखंड अधिकारी को लिखित में शिकायत दी गई थी, लेकिन वन विभाग ने कोई निगरानी नहीं रखी, जिससे यह हादसा दोबारा हुआ।

ग्रामीणों ने मांग की है कि इस झूठे मुकदमे को तुरंत निरस्त किया जाए और दोषी वन अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। मामले को लेकर उपखंड अधिकारी दिनेश शर्मा ने बताया कि ग्रामीणों का ज्ञापन प्राप्त हो गया है, जिसे आवश्यक कार्रवाई के लिए जिला कलेक्टर को भिजवा दिया गया है।