
अलवर. जेलों में बुजुर्ग और बीमार बंदी अब चारपाई या गद्दों पर सोएंगे। जेल मुख्यालय की ओर राज्य की सभी जेलों को इस सम्बन्ध में आदेश दिए गए हैं। अलवर जेल प्रशासन भी जल्द ही बुजुर्ग और बीमार बंदियों के लिए गद्दों की व्यवस्था करने जा रहा है। यहां ऐसे बुजुर्ग और बीमार बंदियों का चयन कर लिया गया है। उन्हें जल्द ही भामाशाहों के माध्यम सोने के लिए गद्दे उपलब्ध करा दिए जाएंगे। अलवर केन्द्रीय कारागार में 900 से ज्यादा बंदी हैं। इनमें से करीब 50 बंदी ऐसे हैं जो ज्यादा बुजुर्ग और बीमार हैं। जिन्हें जमीन पर दरी-पट्टी पर सोने में काफी परेशानी होती है। इन बंदियों के सोने के लिए जेल प्रशासन अच्छे गद्दों की व्यवस्था करेगा। इसके लिए भामाशाहों से सम्पर्क किया जा
रहा है।
सुरक्षा के लिहाज से चारपाई नहीं रखी
जेल मुख्यालय ने बंदियों के लिए चारपाई की व्यवस्था करने के भी आदेश दिए हैं, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से चारपाई घातक साबित हो सकती है। चारपाई में लकड़ी और निवार या रस्सी होती है, जिससे बंदी किसी भी घटना को अंजाम दे सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक अलवर जेल में सुरक्षा के मद्देनजर ही बुजुर्ग और बीमार बंदियों के लिए केवल गद्दों की ही व्यवस्था की जा रही है।
अलग से बैरक में रखा
अलवर जेल प्रशासन ने इस सभी बुजुर्ग और बीमार बंदियों को अलग से बैरक में रखने की व्यवस्था की हुई है। इन से जेल में कामकाज भी नहीं कराया जाता है तथा इनके स्वास्थ्य का भी विशेष ध्यान रखा जाता है।
गद्दों की व्यवस्था करेंगे
जेल मुख्यालय के आदेशों के तहत अलवर जेल में बुजुर्ग और बीमार बंदियों के लिए भामाशाहों के माध्यम से गद्दों की व्यवस्था करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए बुजुर्ग और बीमार बंदियों का चयन भी कर लिया गया है।
राजेन्द्र कुमार, अधीक्षक, केन्द्रीय कारागार, अलवर।