इस बार के उपचुनाव में मतदाता के मन की बात शायद ही कोई पार्टी पहचाने, स्थानीय मुद्दों के हावी रहने का असर पार्टी के परिणाम पर दिखाई दे सकता है।
अलवर. अब से ठीक एक महीने बाद अलवर लोकसभा क्षेत्र में उपचुनाव के लिए वोट डाले जाएंगे। निर्वाचन आयोग की ओर से गुरुवार शाम को उपचुनाव की तारीख का ऐलान करने के साथ ही पूरे जिले में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। अब जिले में न उद्घाटन होंगे और न शिलान्यास हो सकेंगे। अलवर लोकसभा क्षेत्र में पहली बार हो रहे उपचुनाव में ईवीएम के साथ वीवीपेट मशीनों का भी उपयोग किया जाएगा। उपचुनाव में करीब 18 लाख से ज्यादा मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। घोषित उपचुनाव कार्यक्रम के तहत अलवर लोकसभा क्षेत्र की सभी आठों विधानसभा क्षेत्रों में 29 जनवरी को वोट डाले जाएंगे। वहीं एक फरवरी को मतगणना होगी।
उपचुनाव की घोषणा के साथ ही अलवर जिले में शिलान्यास कार्यों के शिलालेख से पर्दे हटाने व उद्घाटन के नारियल फोडऩे पर पूरी तरह रोक लग गई है। उल्लेखनीय है कि अलवर जिले में उपचुनाव की स्थिति बनते ही राज्य सरकार के मंत्रियों व नेताओं की ओर से तूफानी दौरे किए जा रहे थे, इन दौरों में सरकार ने विभिन्न स्थानों पर घोषणाएं की। नए कार्यों की घोषणाओं का दौर उपचुनाव की तिथि घोषित होने से पूर्व तक चलता रहा। लेकिन अब तीन फरवरी तक उद्घाटन, शिलान्यास व नए कार्यों की घोषणा पर विराम लग गया है।
अलवर लोकसभा क्षेत्र में पहला उपचुनाव
अलवर लोकसभा क्षेत्र में 29 जनवरी को पहली बार उपचुनाव होगा। यह उपचुनाव पूर्व सांसद महंत चांदनाथ के आकस्मिक निधन के चलते हो रहा है। हालांकि इससे पहले भी पूर्व सांसद घासीराम यादव का निधन उनके लोकसभा कार्यकाल 1998-99 के दौरान हुआ था, लेकिन उनके निधन के बाद केन्द्र की भाजपा सरकार गिर जाने से वर्ष 1999 में लोकसभा का चुनाव हुआ। इस कारण उस दौरान उपचुनाव नहीं कराया गया। लोकसभा उपचुनाव की घोषणा के साथ ही पूरे जिले में आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू हो गई है। चुनाव आचार संहिता का राजनीतिक दलों, चुनाव लडऩे वाले प्रत्याशियों को पालन करना होगा। आचार संहिता के उल्लंघन पर निर्वाचन आयोग की ओर से कार्रवाई की जाएगी। यह आचार सहिंता राज्य सरकार एवं केन्द्र सरकार पर लागू होगी।
18 लाख से ज्यादा कर सकेंगे मतदान
उपचुनाव में अलवर लोकसभा क्षेत्र में शामिल अलवर शहर, अलवर ग्रामीण, बहरोड़, मुण्डावर, तिजारा, किशनगढ़बास, रामगढ़, राजगढ़-लक्ष्मणगढ़ विधानसभा क्षेत्रों के मतदाता वोट डाल सकेंगे। वर्तमान में अलवर लोकसभा क्षेत्र में 17 लाख 97 हजार 513 मतदाता हैं। जबकि अंतिम मतदाता सूची में शामिल मतदाता उपचुनाव में मतदान कर सकेंगे। यानि वर्तमान मतदाताओं की संख्या अभी वृद्धि होगी।
कांग्रेस व भाजपा के बीच मुकाबला
उपचुनाव में मुख्य मुकाबला भाजपा एवं कांग्रेस प्रत्याशियों के बीच ही रहने के आसार हैं। जिले में तीसरे मोर्चे के दलों की अब तक प्रभावी भूमिका नहीं रही है। इस कारण उपचुनाव में भी तीसरे दल के प्रभावी प्रदर्शन की कम ही संभावना है। अब तक हुए ज्यादातर लोकसभा चुनावों में भी मुख्य मुकाबला कांग्रेस व भाजपा या पूर्व में जनता दल, जनता पार्टी से रहता आया है। यानि चुनाव में दो दलों के प्रत्याशियों की भूमिका भी विशेष रहती आई है।
मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन 2 को
अलवर लोकसभा क्षेत्र के 8 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की फोटोयुक्त मतदाता सूचियों का विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कार्यक्रम के तहत फोटोयुक्त मतदाता सूचियों का अन्तिम प्रकाशन 2 जनवरी को किया जाएगा।