ज्यादातर ये खानें टहला, खोह दरीबा, टोडा जयसिंहपुरा, झिरी आदि क्षेत्र की। अब यहां पर पसरा सन्नाटा।
राजगढ़. सरिस्का में क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट (सीटीएच) को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरिस्का अभयारण्य के सीटीएच के एक किलोमीटर के दायरे में आने वाली करीब 100 खानें बंद हो गई है। ज्यादातर ये खानें टहला, खोह दरीबा, टोडा जयसिंहपुरा, झिरी आदि क्षेत्र में थी। अब इन खानों पर सन्नाटा पसरा हुआ हैं।
सूत्रों के अनुसार इन खानों से मार्बल पत्थर राजगढ़, अलवर, थानागाजी व बापी, दौसा के औद्योगिक क्षेत्रों में मिनरल ग्राइंडिंग का काम करने वाली करीब 400 फैक्ट्रियों को सप्लाई होता था। अब इनको पत्थर नहीं मिलने के कारण ये फैक्ट्रियां अब दम तोड़ने लगी हैं। इन फैक्ट्रियों से रोजाना 4000 मजदूरों को सीधा रोजगार मिला हुआ था।करीब 3000 मूर्तिकारों को भी रोजगार मिला हुआ था। अब इन फैक्ट्रियों में काम नहीं होने के कारण इन मजदूरों के सामने भी रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया हैं। राजगढ़, अलवर, थानागाजी व बापी, दौसा की इन फैक्ट्रियों में रोजाना पहले औसतन 15000 टन पाउडर बनता था, जो अब रॉमैटेरियल नहीं मिलने के कारण रोजाना का उत्पादन लगभग 15 से 20 प्रतिशत ही रह गया हैं।
आने वाले दिनों में यह काम भी बंद सा ही हो जाएगा। ये खानें बंद होने के बाद फैक्ट्री मालिकों को अब मकराना, राजनगर, झिरी की कुछ बची खानों से पत्थर मंगाना पड़ रहा हैं, जो लगभग ढाई गुना महंगा पड़ रहा हैं। पत्थर महंगा आने के कारण बाजार में कंप्टीशन बढ़ गया हैं। जिससे यहां का व्यापार कम होता जा रहा हैं। जिससे पाउडर खरीदने वाले व्यापारी लोगों का रुख राजगढ़, अलवर व बापी, दौसा को छोड़कर राज्य के अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में होने लग गया हैं। इन सब चीजों को ध्यान में रखकर अब यहां के फैक्ट्री मालिकों ने भी मकराना, राजसमंद, बांसवाड़ा, आबू रोड, उदयपुर आदि इलाकों में नए प्लांट लगाना शुरू कर दिए हैं। कुछ प्लांटों में तो उत्पादन भी शुरू हो गया हैं। इन खानों से सरकार को करीब 80 करोड़रूपए रॉयल्टी के रूप में राजस्व प्राप्त होता हैं। इन खानों के बंद होने से सरकार को राजस्व की हानि होगी। उक्त फैक्ट्रियों का करोड़ रुपए का टर्नओवर होने कारण करोड़रूपए का जीएसटी प्राप्त होता हैं। उसका भी सरकार को नुकसान होगा। इन फैक्ट्रियों से रोजाना 500 से अधिक ट्रकों को काम मिल रहा हैं। इनके सामने भी संकट पैदा हो गया हैं।
उद्यमी यह बोले
राजगढ़ उद्योग संघ अध्यक्ष गोपेश कुमार शर्मा का कहना है कि पहले ये खानें 50 सालों से चल रही थी। उस समय खनिज विभाग में खानें आसानी से अलॉट हो जाती थी। इनको चलाने में कोई परेशानी नहीं आती थी। रीको से राजगढ़ इंडस्ट्रीज एरिया में जमीन लेकर प्लांट लगाए। अब राज्य सरकार व केंद्र सरकारों की ओर से रोज नए नए नियम लगाकर इन खानों को बंद कराया जा रहा हैं। ऐसे में हम फैक्ट्री मालिकों का क्या कसूर हैं। अब हम कहां जाएं। जो फैक्ट्री मालिक अन्य जगहों पर फैक्ट्री लगा सकता हैं, वह तो लगा लेगा, लेकिन हर मालिक तो हर जगह नहीं जा सकता। मुश्किलों से इस प्रकार के व्यापार को राजगढ़ जैसी छोटी जगह पर स्थापित किया और अब इस समस्या ने उद्यमियों को गंभीर संकट में डाल दिया हैं।
उद्योग संघ राजगढ़ के सचिव उज्जवल जैन का कहना है कि पुराने ऑर्डर पूरे नहीं कर पाने के कारण मालिकों का पैसा मार्केट में अटक गया हैं। बैंकों से पैसा लोन पर लिया हुआ हैं। उसका ब्याज चुकाने में परेशानी हो रही हैं। मूल रकम अभी पूरी भी नहीं चुकाई गई हैं। अब आगे बैंकों से ऋण लेने में भी दिक्कत होगी। उद्यमी बैंकों में डिफाल्टर हो रहे हैं। पैसा जमा नहीं करने के कारण फैक्ट्रियों के बिजली के कनेक्शन कटने लगे हैं। कुछ फैक्ट्री मालिकों ने स्वयं की इच्छा से बिजली का कनेक्शन कटाने में भी रुचि दिखाई हैं।
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