राज्य में चिकित्सकों की हड़ताल के चलते सभी को परेशानियां हो रही है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में हालत और भी खराब हैैै।
अलवर. सेवारत चिकित्सकों की हड़ताल का असर इस बात से सहज लगाया जा सकता है कि जिस अस्पताल में 24 घंटे मरीजों की भीड़ रहती थी, वहां शुक्रवार को सन्नाटा छाया हुआ था। समाान्य अस्पताल के आडट डोर के कमरा नम्बर 10 के बाहर लाइन में मरीज लगे हुए थे, तो अन्य कमरों पर ताला लगा था। सामान्य, जनाना व शिशु अस्पताल के वार्ड खाली थे। ट्रोमा सेंटर के बाहर कुछ लोग जमीन पर लेटे हुए थे, तो कुछ लोग इलाज के लिए इधर उधर घूमते दिखाई दिए। मरीजों की कोई सुध लेने वाला कोई नजर नहीं आया।
सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों की हड़ताल को सात दिन बीत चुके हैं। हड़ताल के दौरान अलवर शहर की तुलना में जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में हालात ज्यादा खराब हैं। सामान्य, जनाना व शिशु अस्पताल, डिस्पेंसरी व सैटेलाइट अस्पताल के आउट डोर में शुक्रवार को 849 मरीजों का इलाज हुआ। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को इलाज नहीं मिल रहा है।
कुछ अस्पतालों को छोडक़र किसी भी अस्पताल में डॉक्टर की सुविधा उपलब्ध नहीं है। तीनों अस्पताल में सेना के तीन डॉक्टर, आयुर्वेद के 8, मेडिकल यूनिट का एक डॉक्टर, एक डॉक्टर सीएमएचओ की तरफ से लगाया गया था व एक डॉक्टर संविदा का ड्यूटी पर पहुंचा। सुबह से ही अस्पताल में मरीजों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। केवल मेडिकल ओपीडी में मरीजों को डॉक्टर की सुविधा मिली।
जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में हालात ज्यादा खराब हैं, सीएचसी व पीएचसी में इलाज की कोई सुविधा नहीं हैं। इलाज के लिए मरीज चक्कर लगा रहे हैं। मरीजों को मजबूरी में निजी अस्पताल में जाना पड़ रहा है। जबकि इलाज के अभाव में कई लोगों की अब तक मौत भी हो चुकी है। लेकिन इस तरफ किसी का ध्यान नहीं हैं। निजी अस्पतालों में मरीजों के मोटे बिल बन रहे हैं।
अस्पताल के वार्ड हुए खाली
सामान्य, जनाना व शिशु अस्पताल के वार्ड पूरी तरह से खाली हो चुके हैं। शिशु अस्पताल स्थित एफबीएनसी यूनिट अन्य वार्डों में मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है। भर्ती मरीजों को भी छुटटी दे दी गई है। एेसे में नर्सिंग कर्मी दिनभर खाली बैठे रहते हैं।
सीएचसी व पीएचसी के हालात खराब
जिले में 37 सीएचसी व 122 पीएचसी हैं। सीएचसी में स्वास्थ्य विभाग की तरफ से आयुर्वेद डॉक्टर की व्यवस्था की गई है। जबकि पीएचसी नर्सिंग कर्मियों के भरोसे चल रहे हैं। कई सीएचसी में आयुर्वेद डॉक्टर भी नहीं हैं। आयुर्वेद डॉक्टर आयुर्वेदी दवा लिख रहे हैं, जो मरीजों को अस्पताल में नहीं मिल रही है।