अलवर. राजस्थान ही नहीं देश के बाहरी राज्यों के किसानों के लिए खरपतवार (कांग्रेसी घास) सिरदर्द बनी हुई है। इस खरपतवार की कहानी आज से लगभग 67 पुरानी है। जब भारत में गेहूं को बाहरी देशों से आयात किया। तब यह खरपतवार भारत में पहुंचा। अब इसका बीज देश के प्रत्येक हिस्से में पहुंच गया है, जो दिन प्रतिदिन फल-फूल रहा है।
-भारत में 67 साल से कर रही वृद्धि, किसान परेशान
-फसलों को नुकसान पहुंचा रही है कांग्रेसी घास
अलवर. राजस्थान ही नहीं देश के बाहरी राज्यों के किसानों के लिए खरपतवार (कांग्रेसी घास) सिरदर्द बनी हुई है। इस खरपतवार की कहानी आज से लगभग 67 पुरानी है। जब भारत में गेहूं को बाहरी देशों से आयात किया। तब यह खरपतवार भारत में पहुंचा। अब इसका बीज देश के प्रत्येक हिस्से में पहुंच गया है, जो दिन प्रतिदिन फल-फूल रहा है। इस पौधे का नाम है कांग्रेस घास। इस घास के पनपने से किसानों की फसल प्रभावित हो रही है। अब यह महामारी की तरह से फैल चुकी है।
इन स्थानों पर मिलती है प्रमुखता से
कांग्रेसी घास देश व राज्य में खाली पड़ी जगहों, अनुपयोगी भूमि, किसानों के खेत, औद्योगिक क्षेत्र, बगीचों, नदी, बांध, तालाब, सार्वजनिक स्थलों जैसे पार्क, स्कूल, रहवासी क्षेत्र, सड़क, खेल के मैदान, रेलवे लाइनों के किनारे पर बहुतायात में पाई जाती है।
ऐसा होता है कांग्रेस घास का पौध
कृषि अधिकारी मोहन लाल वर्मा ने बताया कि कांग्रेस घास का पौधा एक वर्षीय शाकीय पौधा है। इसकी लम्बाई लगभग 0.5 से एक मीटर तक होती है। इसकी पत्तियां सामान्य तौर पर गाजर की तरह होती है। इसमें आने वाले फूल का रंग सफेद होता है। एक पौधे से एक हजार से लेकर पांच हजार तक बीज पैदा किए जाते हैं। कांग्रेसी घास का पौधा अपना जीवन चक्र दो- तीन माह में पूरा कर लेता है। इस पौधे की खासियत ही है कि यह केवल दिसंबर व जनवरी माह में नहीं पनपती है अन्यथा सभी माह में बढ़ती रहती है।