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Eid ul Adha 2026: देश-दुनिया में अमन-चैन की दुआ, ईदगाहों पर अदा की गई बकरीद की मुख्य नमाज

Eid ul Adha 2026 देशभर में आज ईदुल अजहा (बकरीद) का त्योहार अकीदत और पूरे उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। सुबह से ही मुस्लिम समाज के लोग पारंपरिक लिबास पहनकर ईदगाहों और मस्जिदों की तरफ रवाना हुए, जहां उन्होंने सामूहिक रूप से नमाज अदा की।

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namaz alwar

बकरीद की मुख्य नमाज (फोटो - पत्रिका)

Eid ul Adha 2026 आज सुबह से ही मस्जिदों और ईदगाहों में रौनक देखने को मिल रही है। त्योहार को लेकर हर उम्र के लोगों में, खासकर बच्चों में एक अलग ही उत्साह है। अलवर में ईद की मुख्य नमाज कालाकुआं और नया बास स्थित ईदगाह पर सुबह 8 बजे अदा की गई। यहां हजारों की संख्या में जुटे नमाजियों को इमाम मौलाना मुहम्मद अमजद कासमी ने नमाज अता कराई और खुतबा पढ़ाया। जैसे ही नमाज मुकम्मल हुई, सभी ने एक-दूसरे को गले लगाकर 'ईद मुबारक' कहा और त्योहार की बधाइयां दीं।

सुरक्षा और सुविधाओं के कड़े इंतजाम

भीषण गर्मी को देखते हुए प्रशासन और ईदगाह कमेटियों की ओर से इस बार खास इंतजाम किए गए हैं। नमाजियों को चिलचिलाती धूप से बचाने के लिए टेंट और बड़े पैमाने पर छाया की व्यवस्था की गई थी। इसके साथ ही, ठंडे पानी के इंतजाम भी देखने को मिले। शांति और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस और स्थानीय प्रशासन सुबह से ही पूरी तरह मुस्तैद नजर आया। ईदगाह और उसके आस-पास के संवेदनशील इलाकों में पुलिस बल तैनात किया गया है, ताकि यातायात व्यवस्था सुचारू रूप से चलती रहे और लोग बिना किसी परेशानी के त्योहार मना सकें।

बाजारों देर रात तक चली खरीदारी

ईदुल अजहा (बकरीद) के पर्व को लेकर शहर के बाजारों में बुधवार को दिनभर चहल-पहल और उत्साह का माहौल रहा। त्योहार से एक दिन पहले लोगों ने जमकर खरीदारी की, जिससे प्रमुख बाजारों में देर रात तक रौनक बनी रही। नए कपड़ों की दुकानों पर सबसे अधिक भीड़ देखने को मिली, जहां युवाओं और बच्चों ने कुर्ता-पायजामा, पठानी सूट तथा डिजाइनर टोपियों की खरीदारी की। बढ़ती ग्राहकी से कपड़ा व्यापारियों में भी खासा उत्साह नजर आया।

इसके अलावा सेवइयों, मेवों, इत्र और अन्य खाद्य सामग्री की दुकानों पर भी ग्राहकों की लंबी कतारें लगी रहीं। परिवारों ने त्योहार की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए आवश्यक सामान खरीदा। बाजारों में बढ़ी भीड़ के चलते व्यापारियों की बिक्री में भी वृद्धि दर्ज की गई। त्योहार को लेकर लोगों में उत्साह और उल्लास साफ दिखाई दिया तथा पूरे शहर में उत्सव जैसा माहौल बना रहा।


कुर्बानी की परंपरा

बकरीद का यह पर्व त्याग और समर्पण का प्रतीक है। नमाज खत्म होने के बाद अब लोग अपने-अपने घरों का रुख कर रहे हैं, जहां अल्लाह की राह में बकरों की कुर्बानी देने का सिलसिला शुरू हो चुका है। कुर्बानी के बाद इस गोश्त को तीन बराबर हिस्सों में बांटा जाता है, जिसका एक हिस्सा गरीबों और जरूरतमंदों को, दूसरा हिस्सा रिश्तेदारों को और तीसरा हिस्सा अपने परिवार के लिए रखा जाता है। घरों में मेहमानों के आने-जाने का सिलसिला भी शुरू हो चुका है।