अलवर जिला परिषद की लिपिक भर्ती-2022 के बाद अब वर्ष 2017 में की गई भर्तियों में गड़बडि़यां सामने आने लगी है।
अलवर जिला परिषद की लिपिक भर्ती-2022 के बाद अब वर्ष 2017 में की गई भर्तियों में गड़बडि़यां सामने आने लगी है। एक महिला लिपिक ने पंचायती राज विभाग और चिकित्सा विभाग दोनों में कार्य किया और उसका अनुभव प्रमाण पत्र भी जारी हो गया, उसी आधार पर उसे परिषद ने लिपिक की नौकरी दे दी। यह प्रकरण भी जांच के लिए राज्य स्तर पर भेजा गया है। अधिकारियों का कहना है कि उनके पास मामला आएगा, तो जांच कराएंगे।
वर्ष 2013 में ऑनलाइन आवेदन भरते समय इस महिला ने खुद को निर्मल भारत अभियान के तहत 10 सितंबर 2009 से 2013 तक ग्राम पंचायत शाहजहांपुर में कंप्यूटर ऑपरेटर पद पर कार्यरत होना बताया। साथ ही इसका अनुभव प्रमाण पत्र डीपीसी से जारी होना दर्ज किया। उस दौरान ग्राम पंचायत स्तर पर निर्मल भारत अभियान योजना के तहत ऐसा कोई पद स्वीकृत ही नहीं था। नौकरी लेते समय दिए गए अनुभव प्रमाण पत्र में खुद को 10 सितंबर 2009 से 2013 तक बीसीएमओ शाहजहांपुर कार्यालय में मुख्यमंत्री जीवन रक्षा कोष में कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर कार्यरत होना बताया।
इस प्रकार महिला ने ऑनलाइन आवेदन और अनुभव प्रमाण पत्र में एक ही समय में अलग-अलग कार्यालय में पदस्थापित होना बताया। इसी अवधि के दौरान ही जयपुर की निम्स यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर की पीजीडीसीए डिग्री भी हासिल की। इस प्रकार महिला के आवेदन और अनुभव प्रमाण पत्र में गड़बड़ी के साथ-साथ कंप्यूटर डिग्री में भी अनुभव अवधि ओवरलैप हो रही थी। इसके बावजूद जिला परिषद ने इसको क्लर्क पद पर नियुक्त कर दिया। बता दें कि हाल ही में सीकर सीईओ की ओर से बीसीएमओ दातारामगढ़ की ओर से जारी अनुभव प्रमाण पत्रों से इसी योजना में कार्यरत दो लिपिकों को बर्खास्त किया है।
बानसूर पंचायत समिति में भी बीसीएमओ दातारामगढ़ के एक ऐसे ही अनुभव प्रमाण पत्र से एक लिपिक के वर्ष 2017 में नियुक्त होने के दस्तावेज सामने आए हैं। यह लिपिक भी बीसीएमओ कार्यालय दांतारामगढ़ में व्यक्तिगत अनुबंध के आधार पर ड्रग वेयर हाउस में कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर कार्यरत था। इसे भी वहीं से अनुभव प्रमाण पत्र जारी हुआ है, जिसके आधार पर सीकर सीईओ ने लिपिक बर्खास्त किए हैं।