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एमएसपी पर गेहूं खरीद फिसड्डी: 24 में से 23 केंद्रों पर एक दाना भी नहीं खरीदा

Wheat purchase on MSP न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं खरीद की प्रक्रिया इस बार शुरुआत चरण में ही लड़खड़ा गई है।

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Wheat purchase on MSP न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं खरीद की प्रक्रिया इस बार शुरुआत चरण में ही लड़खड़ा गई है। अलवर, खैरथल-तिजारा, डीग, भरतपुर और करौली जिलों में बनाए गए 24 खरीद केन्द्रों में से 23 केन्द्रों पर अब तक गेहूं का एक दाना भी नहीं खरीदा जा सका है। केवल हिंडौन सिटी में 17 किसानों से गेहूं की खरीद हो पाई है।

किसान केन्द्रों के चक्कर काट रहे

सरकार ने 16 मार्च से गेहूं खरीद शुरू करने के निर्देश दिए थे। कामां, पहाड़ी, डीग, टोडाभीम, करौली और अलवर सहित कई क्षेत्रों के किसान केन्द्रों के चक्कर काट रहे हैं। टोकन मिलने के बावजूद किसानों को बुलावा नहीं आ रहा, जिससे उनमें नाराजगी बढ़ रही है। करीब 70 प्रतिशत किसान अपनी फसल मंडियों तक लाने की तैयारी कर चुके हैं। खरीद शुरू नहीं होने से उन्हें आर्थिक दबाव झेलना पड़ रहा है। किसी को मजदूरी का भुगतान करना है, तो किसी को बच्चों की स्कूल फीस भरनी है। ऐसे में देरी उनकी मुश्किलें और बढ़ा रही है।

300 से 400 रुपए प्रति क्विंटल का नुकसान

एमएसपी पर गेहूं का भाव 2735 रुपए प्रति क्विंटल तय है, जबकि स्थानीय मंडियों में आढ़ती 2300 से 2400 रुपए प्रति क्विंटल ही दे रहे हैं। मजबूरी में कई किसान औने-पौने दाम पर गेहूं बेचने को मजबूर हैं, जिससे उन्हें प्रति क्विंटल 300 से 400 रुपए तक का सीधा नुकसान उठाना पड़ रहा है।

नमी बनी सबसे बड़ी बाधा

हाल ही में हुई बारिश ने गेहूं खरीद की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। फसल में नमी बढ़ने के कारण गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतर पा रही है। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआइ) के अधिकारियों ने तीनों जिलों से सैंपल लेकर रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेज दी है। तय मानकों से अधिक नमी होने के चलते फिलहाल खरीद प्रक्रिया रोकी गई है।

सरकारी छूट का इंतजार

बारिश की वजह से गेहूं में आई नमी को देखते हुए एफसीआइ कार्मिकों ने रिपोर्ट तैयार करके केन्द्र सरकार को भेज दी है। उम्मीद जताई जा रही है कि नमी के मानकों में कुछ छूट दी जा सकती है, जिससे खरीद प्रक्रिया को गति मिल सके। अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही केंद्र से दिशा-निर्देश मिलेंगे, खरीद प्रक्रिया तुरंत शुरू कर दी जाएगी।

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