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खंडहर की दीवार पर ‘पहरेदार’ की तरह तैनात दिखी बाघिन ST-2302

राजस्थान के अलवर जिले में स्थित सरिस्का टाइगर रिजर्व इन दिनों पर्यटकों के लिए रोमांच का केंद्र बना हुआ है। हाल ही में अलवर शहर से सटे बाला किला क्षेत्र में एक ऐसा दुर्लभ नजारा देखने को मिला, जिसने सफारी पर आए पर्यटकों को रोमांचित कर दिया। यहां बफर जोन के जंगल में टाइग्रेस ST-2302 […]

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बाघिन ST-2302

राजस्थान के अलवर जिले में स्थित सरिस्का टाइगर रिजर्व इन दिनों पर्यटकों के लिए रोमांच का केंद्र बना हुआ है। हाल ही में अलवर शहर से सटे बाला किला क्षेत्र में एक ऐसा दुर्लभ नजारा देखने को मिला, जिसने सफारी पर आए पर्यटकों को रोमांचित कर दिया। यहां बफर जोन के जंगल में टाइग्रेस ST-2302 एक पुराने खंडहर भवन की ऊंची दीवार पर शान से बैठी नजर आई। पर्यटकों ने इस अद्भुत दृश्य को अपने कैमरों में कैद किया, जो अब सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियां बटोर रहा है।

दो नन्हे शावक भी नीचे ही मौजूद

यह रोमांचक घटना उस समय हुई जब पर्यटक करणी माता मंदिर और अंधेरी क्षेत्र के पास स्थित वाटर हॉल के समीप से गुजर रहे थे। इसी वाटर हॉल के पास एक जर्जर और खंडहरनुमा भवन स्थित है। अचानक पर्यटकों की नजर भवन की सबसे ऊंची दीवार पर पड़ी, जहां बाघिन ST-2302 बेहद सुकून के साथ बैठी हुई थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बाघिन कभी दीवार पर बैठ जाती तो कभी चौकन्नी होकर खड़ी होकर दूर तक जंगल का मुआयना करने लगती। इस बाघिन के साथ उसके दो नन्हे शावक भी नीचे ही मौजूद थे। हालांकि, शावक दीवार के ऊपर नहीं आए और नीचे झाड़ियों के ओट में ही रहे, लेकिन बाघिन काफी देर तक दीवार पर डटी रही।


जंगल में अचानक हुई किसी हलचल ने जब बाघिन का ध्यान खींचा, तो वह एक पल में सतर्क होकर खड़ी हो गई और शिकार या खतरे की आहट लेने लगी। कुछ देर तक जंगल को निहारने के बाद वह शालीनता से दीवार से नीचे उतरी और घने जंगल की ओर ओझल हो गई। सरिस्का का यह बफर जोन सीधे अलवर शहर की सीमाओं को छूता है। पहाड़ की चोटी पर स्थित ऐतिहासिक बाला किला और नीचे सघन वन क्षेत्र के बीच यह इलाका वन्यजीवों की पसंदीदा जगह बनता जा रहा है। पहाड़ियों के बीच करणी माता का मंदिर और पास ही स्थित जलाशय इस क्षेत्र को बाघों के लिए अनुकूल बनाते हैं।

50 से अधिक बाघ-बाघिन

सरिस्का टाइगर रिजर्व के लिए यह सुखद संकेत है कि यहां बाघों का कुनबा लगातार बढ़ रहा है। वर्तमान में रिजर्व में बाघ, बाघिन और शावकों की कुल संख्या 50 के आंकड़े को पार कर चुकी है। बाघों की बढ़ती संख्या और उनके इस तरह के खुले दीदार ने न केवल वन्यजीव प्रेमियों को उत्साहित किया है, बल्कि सरिस्का में पर्यटन को भी नए पंख लगा दिए हैं। प्रशासन की ओर से भी इस क्षेत्र में पर्यटकों की सुरक्षा और बाघों के संरक्षण के लिए विशेष सतर्कता बरती जा रही है।