अलवर

कौथल गांव की बेटियां पेड़-पौधों को राखी बांधकर मनाती हंै रक्षाबंधन

पर्यावरण बचाओ का देती हंै संदेशसात पहले गांव में शुरू की गई थी यह मुहिम

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Aug 22, 2021
कौथल गांव की बेटियां पेड़-पौधों को राखी बांधकर मनाती हंै रक्षाबंधन

अलवर. रक्षाबंधन पर सभी बहनें भाइयों को राखी बांधती है लेकिन अलवर में एक गांव ऐसा भी है जहां बहन पेड पौधों को अपना भाई मानती है और हर रक्षाबंधन पर इन पेडों को राखी बांधती है। प्रकृति और पर्यावरण को बचाने के लिए करीब सात साल पहले शुरु की गई यह मुहिम आज भी जारी है।
बानसूर में युवा जागृति संस्थान की ओर से बेटी, पानी, पेड़ एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत यह पहल की जा रही है। बानसूर के बुटेरी गांव पंचायत के कौथल गांव में पहले बेटी के जन्म पर पौधे लगाए जाते हैं, जब बेटी बडी होती है तो इन पौधों को रक्षाबंधन पर राखी बांधती है। इस तरह से यह भाई बहन का रिश्ता जुड़ गया है। इतना ही नहीं पेड पौधों को भाई बनाने के बाद बेटियां सालभर इनकी जिम्मेदारी भी उठाती है। इनको पानी देने, खाद देने के अलावा इनके आसपास साफ सफाई का भी पूरा ख्याल रखती हैं। रक्षाबंधन के दिन तो इस गांव में उत्सव मनाया जाता है, जहां गांव की सभी बेटियां एक साथ अपने लगाए पौधों को राखी बांधती है। गांव की बेटी ज्योति व निकिता ने बताया कि जिस तरह से हमारे भाई हमारी जरूरत हमारी सुरक्षा का ख्याल रखते हैं, उसी तरह से ये पेड़ भी बड़े होने पर हमे फल, छाया, लकड़ी सब कुछ देते हैं। इसलिए जीवन में इनका महत्व भाइयों के समान ही है। बेटियों ने बताया कि रक्षाबंधन से कई दिन पहले अपने पेड़ों के लिए मनपसंद राखी खरीदती हैं। संस्था के संरक्षक गिर्राज सैनी ने बताया कि समाज में बेटा बेटी के भेद को समाप्त करने और भाई बहन के रिश्ते की अहमियत को समझाने के लिए यह पहल की है। उन्होंने बताया कि पेड़ पौधों के कटने से पर्यावरण में असंतुलन होने लगा है । इसलिए इस तरह के प्रयास करके गांव के लोगों को पेड़ों को बचाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। पहले गांव में पेड़ काटे जाते थे, लेकिन अब पेड़ पूजे जाते हैं।

Published on:
22 Aug 2021 01:27 am
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