उपखण्ड के ग्रामीण क्षेत्रों में किराना की दुकानों पर बेची जा रही दवाइयां
अलवर/ मुण्डावर. किराना की दुकान का नाम आते ही आमतौर पर रोजमर्रा का घरेलू सामान यहां मिलने की बात मन में आती है, लेकिन उपखण्ड के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में कई किराना दुकानों की स्थिति कुछ और ही है। इन दुकानों पर चाय-चीनी व अन्य सामान के साथ दवाइयां भी बेची जा रही हैं। बिना डिग्री व डिप्लोमा के ये दुकानदार कमाई के चक्कर में लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं, जबकि जिम्मेदार अधिकारी ऐसे दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई करने की बजाय आंखें मूंदे बैठे हैं।
जानकारी के अनुसार गांव चांदपुर, उलाहेडी, सियाखोह, सरायकलां सहित क्षेत्र के अन्य गांवों में किराना की दुकानों पर बुखार से लेकर अन्य छोटी बीमारियों की दवाइयां बेची जा रही हैं। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग द्वारा ना तो इनकी जांच की जा रही है और ना ही कोई पाबंद कर रहा है।
हो सकता है घातक: राजकीय अस्पताल के चिकित्सक डॉ. घनश्याम खैरिया ने बताया कि दुकानों पर इस तरह से दवाई दिया जाना रोगी के लिए घातक हो सकता है। बिना चिकित्सकीय परामर्श के किसी भी रोग की दवा नहीं लेनी चाहिए। यदि कोई ऐसा करता है तो रोगी के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।
इन बीमारियों की दे रहे दवा
जानकारी के अनुसार दुकानों पर बुखार, दर्द, जुकाम, उल्टी, दस्त आदि की दवाइयां आसानी से मिल जाती हैं। गौरतलब है कि दुकानदार बुखार या दर्द के लिए जो दवा युवा या बुजुर्गों को देते हैं वही दवा बच्चों को भी दे रहे हैं। ऐसा करना किसी भी रोगी को भारी पड़ सकता है।
नीम हकीमों की भी कमी नहीं
क्षेत्र में नीम हकीम भी हावी हैं। गांों में रोगियों को झोलाछाप डॉक्टर मनमर्जी से दवाइयां दे रहे हैं। पिछले दिनों भी गांव सरायकलां में नीम हकीम द्वारा गलत इलाज देने पर एक बच्चे की मौत हो गई थी। इन पर कार्रवाई भी नहीं की जा रही है।
एेसे दवा बेचना गलत
इस तरह से किराना की दुकानों पर दवाइयां बेचना गलत है। यदि कोई इस तरह दवा बेच रहा है तो अभियान चलाकर उक्त किराना दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. बाबूलाल गोठवाल, ब्लॉक सीएमएचओ, मुण्डावर।