
representative picture (AI)
Rajasthan Mining News: राजस्थान में दशकों से चल रहा खानों का सीमा विवाद अब जल्द ही पूरी तरह खत्म होने जा रहा है। दरअसल प्रदेशभर में जमीनों और खानों के सीमा विवाद के पीछे तकनीक का बदलना एक बड़ा कारण रहा है।
साल 1970 के दशक में जब ये खानें आवंटित हुई थीं, तब जमीनों का सीमाज्ञान 'जरीब' (लोहे की चेन) जैसे पारंपरिक साधनों से किया जाता था। समय बदलने के साथ नाप-जोख के तौर-तरीके भी पूरी तरह बदल गए। इसके बाद पहले जीपीएस (GPS) और अब बेहद आधुनिक तकनीक डीजीपीएस (DGPS) का इस्तेमाल किया जाने लगा है।
इस नई और हाईटेक मशीन से नाप-जोख करने पर सटीकता (एक्यूरेसी) तो बहुत ज्यादा बढ़ गई है, लेकिन पुरानी नाप के मुकाबले अब खानों की दूरी और पोजिशन में बड़ा अंतर आने लगा है। इसी तकनीकी अंतर की वजह से प्रदेश की सैकड़ों खानें कानूनी विवादों में फंस गईं और लंबे समय से उनका काम पूरी तरह रुक गया। अकेले अलवर जिले की ही दर्जनभर से ज्यादा महत्वपूर्ण खानें इस समय सीमा विवाद के फेर में अटकी हुई हैं और इनके मामले अदालतों में चल रहे हैं।
इस पेचीदा समस्या को सुलझाने के लिए सरकार ने जो नई एसओपी बनाई है, उसके तहत खान और फॉरेस्ट लैंड (वन भूमि) के बीच आने वाले अंतर को आपसी तालमेल से घटाते हुए नई सीमाएं तय की जाएंगी। इसमें सबसे बड़ी और राहत की बात यह है कि नाप-जोख के दौरान अगर किसी खान की जमीन कम या ज्यादा निकलती है, तो उसे जबरन लागू नहीं किया जाएगा।
जमीन को कम तभी माना जाएगा जब लीज होल्डर (खान संचालक) इसके लिए अपनी लिखित सहमति देगा। इस फॉर्मूले से वन विभाग को भी अपने हिस्से की पूरी जमीन मिल जाएगी और खान मालिकों का रुका हुआ संचालन भी दोबारा शुरू हो सकेगा।
इस मामले को लेकर राजस्थान स्टोन क्रेशर एसोसिएशन ने भी खान निदेशालय को अपनी कई व्यवहारिक दिक्कतों से अवगत कराया था। इन सभी विसंगतियों और समस्याओं को दूर करने के लिए खान एवं भू-विज्ञान विभाग के निदेशक एमपी मीणा ने आगामी 22 जून को एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है।
इस बैठक में एसोसिएशन के पदाधिकारियों के साथ सीधी वार्ता की जाएगी, जिसमें नई एसओपी को अमलीजामा पहनाने और सालों से कोर्ट-कचहरी में अटके इन मामलों को हमेशा के लिए निपटाने पर अंतिम मुहर लगेगी। सरकार के इस कदम से माइनिंग सेक्टर में व्यापार बढ़ेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे।
Published on:
15 Jun 2026 12:05 pm
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