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Alwar: आग लगी तो कैसे बचेंगे मरीज… जिले के 114 सरकारी अस्पतालों में 92 के पास फायर एनओसी नहीं

जिले के सरकारी अस्पतालों में आग बुझाने के इंतजाम नाकाफी हैं। मई-2026 की फायर एनओसी रिपोर्ट के मुताबिक जिले के 114 सरकारी अस्पतालों और सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में से 92 बिना फायर एनओसी के संचालित हो रहे हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इन अस्पतालों में आने वाले मरीज कितने सुरक्षित हैं।

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अलवर

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Umesh Sharma

Jun 15, 2026

fire equipment

फायर इक्विपमेंट फाइल फोटो

मरीजों की जान बचाने का जिम्मा संभालने वाले अलवर के सरकारी अस्पताल खुद अग्नि सुरक्षा के मोर्चे पर गंभीर लापरवाही बरत रहे हैं। मई-2026 की फायर एनओसी रिपोर्ट के मुताबिक जिले के 114 सरकारी अस्पतालों और सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में से 92 बिना फायर एनओसी के संचालित हो रहे हैं। इनके पास आग जैसी आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक सुरक्षा प्रमाणन तक नहीं है।

रिपोर्ट के अनुसार जिला अस्पताल और जिले के दोनों उप जिला अस्पतालों ने फायर सुरक्षा मानकों की पालना करते हुए फायर एनओसी प्राप्त कर रखी है, लेकिन ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माने जाने वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) इस मामले में काफी पीछे हैं। जिले के 76 पीएचसी में से केवल 11 केंद्रों के पास फायर एनओसी है, जबकि 65 पीएचसी बिना इस अनिवार्य सुरक्षा प्रमाणन के संचालित हो रहे हैं। इसी प्रकार 25 सीएचसी में से केवल 8 केंद्रों ने फायर एनओसी प्राप्त की है, जबकि 17 केंद्र अब भी इससे वंचित हैं। सबसे अधिक चिंताजनक स्थिति शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (यूपीएचसी) की है। जिले के सभी 8 यूपीएचसी बिना फायर एनओसी के संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा एक सैटेलाइट अस्पताल, एक यूसीएचसी और अन्य श्रेणी के स्वास्थ्य संस्थानों के पास भी फायर एनओसी नहीं है।

क्यों जरूरी है फायर एनओसी?

फायर एनओसी केवल एक औपचारिक दस्तावेज नहीं, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि अस्पताल में आग लगने की स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं। अस्पतालों में ऑक्सीजन लाइन, जनरेटर, विद्युत उपकरण, दवाइयों का भंडारण और अन्य ज्वलनशील सामग्री होने के कारण आग का खतरा सामान्य भवनों की तुलना में कहीं अधिक होता है। इसके बावजूद अधिकांश सरकारी संस्थानों में अग्नि सुरक्षा मानकों की स्थिति संतोषजनक नहीं है। देशभर में समय-समय पर अस्पतालों में आग लगने की घटनाएं सामने आती रही हैं, जिनमें कई मरीजों की जान तक जा चुकी है। ऐसे में अलवर की यह रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग के लिए किसी चेतावनी से कम नहीं मानी जा रही। विशेषज्ञों का कहना है कि फायर एनओसी के साथ-साथ नियमित फायर ऑडिट, मॉक ड्रिल, अग्निशमन उपकरणों का रखरखाव और कर्मचारियों का प्रशिक्षण भी अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

32 ने पहली बार किया आवेदन

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि 32 सरकारी अस्पतालों ने पहली बार फायर एनओसी के लिए आवेदन किया है। इनमें 19 पीएचसी, 12 सीएचसी और एक सैटेलाइट अस्पताल शामिल हैं।

128 निजी अस्पतालों में से 24 के पास फायर एनओसी नहीं

जिले के 128 निजी अस्पतालों में से 104 के पास फायर एनओसी है, जबकि 24 अस्पतालों के पास यह नहीं है। इनमें 22 अस्पतालों ने पहली बार आवेदन किया है, जबकि एक अस्पताल ने एनओसी के नवीनीकरण के लिए आवेदन किया है। एक अस्पताल की रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। जिले के 50 बेड वाले 19 निजी अस्पतालों में से 18, 30 बेड वाले 48 अस्पतालों में से 44 तथा 100 बेड वाले 10 अस्पतालों में से 7 अस्पतालों के पास फायर एनओसी है। हालांकि 200 बेड श्रेणी का एक बड़ा निजी अस्पताल अब भी बिना फायर एनओसी संचालित हो रहा है।