सैटेलाइट अस्पताल, काला कुआं में चिकित्सकों के विवाद के चलते मेडिको-लीगल केस (एमएलसी) के कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
अलवर. सैटेलाइट अस्पताल, काला कुआं में चिकित्सकों के विवाद के चलते मेडिको-लीगल केस (एमएलसी) के कार्य प्रभावित हो रहे हैं। पुलिस और परिवादियों को बार-बार अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। रिपोर्ट समय पर नहीं मिलने से कानूनी कार्रवाई में देरी हो रही है और पीड़ितों को न्याय मिलने में भी विलंब हो रहा है।
जानकारी के अनुसार अस्पताल में एक मेडिकल ज्यूरिस्ट सहित पांच वरिष्ठ चिकित्सक कार्यरत हैं, लेकिन चिकित्सकों के आपसी विवाद के कारण एमएलसी कार्य समय पर नहीं हो पा रहे हैं। सरकार के नियम हैं कि स्वास्थ्य परीक्षण, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, आयु निर्धारण, यौन उत्पीड़न सहित सभी प्रकार के मेडिको-लीगल कार्यों की रिपोर्ट अधिकतम 24 घंटे में जारी की जानी आवश्यक है। इसके बावजूद सैटेलाइट अस्पताल में एमएलसी रिपोर्ट में अनावश्यक देरी हो रही है।ज्यूरिस्ट नहीं तो वरिष्ठ चिकित्सक करेंगे कामनियमों के अनुसार मेडिकल ज्यूरिस्ट के अवकाश पर रहने या कोर्ट में साक्ष्य देने जाने की स्थिति में अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक को एमएलसी कार्य करना होता है। लेकिन सैटेलाइट अस्पताल में सभी चिकित्सकों ने एमएलसी कार्य करने से इनकार कर दिया है। मामले को गंभीर मानते हुए पीएमओ ने चिकित्सकों की शिकायत निदेशक को भेज दी है।
मोर्चरी का निर्माण भी ठंडे बस्ते में
जनवरी, 2025 में डॉ. गौरव अग्रवाल की मेडिकल ज्यूरिस्ट के पद पर नियुक्ति के बाद एडीएम सिटी बीना महावर और सीएमएचओ डॉ. योगेन्द्र शर्मा की अध्यक्षता में हुई आरएमएस बैठक में सैटेलाइट अस्पताल में मोर्चरी और ऑपरेशन थियेटर निर्माण को मंजूरी दी गई थी। लेकिन इच्छाशक्ति के अभाव में मामला ठंडे बस्ते में चला गया। बाद में अस्पताल प्रशासन ने जगह के अभाव का तर्क दिया, जबकि जानकारों का कहना है कि अस्पताल के दाईं ओर खाली स्थान में 6 बाई 8 या 6 बाई 10 में आसानी से मोर्चरी बनाई जा सकती है।
जिला अस्पताल पर बढ़ रहा दबाव
जिला अस्पताल का दबाव कम करने के उद्देश्य से सैटेलाइट अस्पताल में अरावली विहार, एमआइए और वैशाली नगर थानों से जुड़े स्वास्थ्य परीक्षण और एमएलसी कार्य शुरू किए गए थे। लेकिन अव्यवस्थाओं के कारण यहां मेडिकल ज्यूरिस्ट की सेवाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। मेडिकल ज्यूरिस्ट की नियम विरुद्ध नाइट ड्यूटी और ओपीडी में ड्यूटी लगाने से मेडिको-लीगल कार्य प्रभावित हुए। इसके चलते एमआइए और वैशाली नगर थानों के एमएलसी कार्य फिर से जिला अस्पताल में शुरू करने पड़े।
जिम्मेदारी से बच रहे चिकित्सक
सरकारी नियमों के अनुसार राजकीय चिकित्सा संस्थानों में फोरेंसिक मेडिसिन के कनिष्ठ या वरिष्ठ विशेषज्ञ होने पर एमएलसी कार्य वही करेंगे। यदि ऐसे विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं हों तो फोरेंसिक मेडिसिन में पीजी या डिप्लोमाधारी चिकित्सा अधिकारी यह कार्य कर सकते हैं। इनके अभाव में अस्पताल के वरिष्ठतम चिकित्सा अधिकारी को एमएलसी कार्य करना होता है। इसके बावजूद सैटेलाइट अस्पताल में इन नियमों की अवहेलना करते हुए चिकित्सकों ने एमएलसी कार्य करने से मना कर दिया है।