भारतीय संविधान के शिल्पकार और भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती आज जिलेभर में हर्षोल्लास के साथ मनाई जा रही है। शहर के अंबेडकर सर्किल पर भारी जनसैलाब उमड़ा। वहीं खैरथल और पिनान में भी शोभायात्राओं की धूम है।
भारतीय संविधान के शिल्पकार और भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती आज जिलेभर में हर्षोल्लास के साथ मनाई जा रही है। शहर के अंबेडकर सर्किल पर भारी जनसैलाब उमड़ा, जहां वन राज्य मंत्री संजय शर्मा ने माल्यार्पण कर बाबा साहेब को याद किया। कार्यक्रमों के चलते शहर में ट्रैफिक डायवर्ट किया गया है, वहीं खैरथल और पिनान में भी शोभायात्राओं की धूम है।
आधुनिक भारत के निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर आज पूरा जिला नीले रंग में रंगा नजर आ रहा है। सुबह से ही विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों की ओर से शहर के अंबेडकर चौराहा स्थित बाबा साहेब की प्रतिमा पर माल्यार्पण और श्रद्धांजलि सभाओं का दौर शुरू हो गया।
राजस्थान सरकार के वन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संजय शर्मा ने अंबेडकर सर्किल पहुंचकर बाबा साहेब की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और उन्हें नमन किया। इस दौरान उन्होंने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि बाबा साहेब केवल एक संविधान निर्माता नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय के सबसे बड़े प्रणेता थे। शोषितों, वंचितों और उपेक्षितों के उत्थान के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण के लिए बाबा साहेब का अमूल्य योगदान हम सभी को निरंतर प्रेरणा देता है। उनके दिखाए मार्ग पर चलकर ही एक सशक्त समाज का निर्माण संभव है।
जयंती समारोह और शोभायात्राओं के मद्देनजर प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। शहर के अंबेडकर सर्किल से भगत सिंह सर्किल के बीच के मुख्य मार्ग पर यातायात को पूरी तरह रोक दिया गया है। भीड़ को देखते हुए पुलिस ने ट्रैफिक को वैकल्पिक रास्तों पर डायवर्ट किया है, ताकि आमजन को परेशानी न हो और शोभायात्रा सुरक्षित रूप से निकल सके।
जिले के खैरथल में भी अंबेडकर जयंती की धूम देखी जा रही है। यहां अंबेडकर सर्किल पर काफी संख्या में लोग जमा हुए, जहां से एक विशाल शोभायात्रा निकाली जा रही है। लोगों में जबरदस्त उत्साह है और झांकियां आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। इसी तरह पिनान में भी डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती सादगी और श्रद्धा के साथ मनाई गई, जहां वक्ताओं ने उनके जीवन दर्शन पर प्रकाश डाला।
पूरे जिले में जयंती के उपलक्ष्य में केवल माल्यार्पण ही नहीं, बल्कि बौद्धिक कार्यक्रमों का भी तांता लगा है। कहीं युवाओं के लिए दौड़ आयोजित की गई, तो कहीं शिक्षण संस्थानों में गोष्ठियों और विभिन्न प्रतियोगिताओं के जरिए बाबा साहेब के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।