केंद्र व राज्य सरकारें तमाम वादे करती हैं। हर माह सरकारी योजनाओं पर करोड़ों रूपए खर्च किए जाते हैं। लेकिन जरुरत मंद अभी भी योजनाओं के लाभ के लिए तरस रहा है। यह हकीकत अलवर में इस कहानी को देखने पर बयां होती है।
अलवर. केंद्र व राज्य सरकारें तमाम वादे करती हैं। हर माह सरकारी योजनाओं पर करोड़ों रूपए खर्च किए जाते हैं। लेकिन जरुरत मंद अभी भी योजनाओं के लाभ के लिए तरस रहा है। यह हकीकत अलवर में इस कहानी को देखने पर बयां होती है।
लवर.
एक बुजुर्ग मां अपने 32 वर्षीय विकलांग व मंद बुद्धि बेटे को पेंशन के लिए 3 साल से यहां-वहां हर जनसुनवाई में चक्कर लगा रही है, प्रशासन इस मां के प्रति संवेदनहीन बना हुआ है। इन्हें ना तो पेंशन मिली ना कोई सरकारी मदद।
हालात ये हैं कि युवक को 4 लोग उठाकर रिक्शे में बैठाते हैं। उतरने के बाद वह जमीन में रेंगता हुआ सरकारी कार्यालय पहुंचता है, लेकिन दुत्कार कर भगा दिया जाता है। 32 वर्षीय राहुल दिमाग से कमजोर है और विकलांग है।
पेंशन बंध जाए
राहुल की पेंशन बंध जाए तो उनके मरने के बाद भी उसकी रोटी का प्रबंध हो सकता है
राहुल के पिता की उम्र 60 वर्ष से अधिक हो चुकी है, फिर भी वे परिवार का पेट पालने के लिए छोटा मोटा काम करते हैं। राहुल की मां शकुंतला उसे पेंशन दिलवाने के लिए 3 साल से सरकारी कार्यालय में चक्कर लगा रही है। लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं है।
हालात ये है कि कार्यालय में चक्कर लगाने में ही हजारों रूपए खर्च हो चुके हैं। क्यों की राहुल को कहीं लेकर जाने के लिए एक रिक्शे की जरुरत होती है। उस के पास ट्राइ साइकिल भी नहीं है। राहुल की मां चाहती है कि एक बार राहुल की पेंशन बंध जाए तो उनके मरने के बाद भी उसकी रोटी का प्रबंध हो सकता है।
इधर, सरकारी कार्यालयों में हालात यह है कि अधिकारी दर्जनों पेपर व दस्तावेज मांग चुके हैं, लेकिन अभी तक राहुल की पेंशन नहीं बंधी है। गुरुवार को भी राहुल अपनी मां के साथ जनसुनवाई में आया और फिर आश्वासन लेकर लौटा है। देखना यह है कि इस बार भी राहुल की पेंशन बंधती है या नहीं।
रैम्प की कमी नजर आई
गर्मी में राहुल रेंगता हुआ कलक्ट्रेट कार्यालय में पहुंचा। कलक्ट्रेट में रैम्प की कमी नजर आई। धूप के चलते फर्श तेज गर्म था। कार्यालय के पास सीढ़ी होने के चलते चार लोगों ने हाथ व पैर पकड़ कर राहुल को उठाया व रिक्शे में बैठाया। इससे राहुल व अन्य जनों को परेशानी हुई।