
अलवर. सरकार ने आम बजट के बाद अलवर जिले में 2 नए जिलों के गठन की घोषणा तो कर दी, लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर यहां सुविधाओं का अभाव है। प्रदेश सरकार की इस घोषणा में अलवर जिले का विभाजन कर खैरथल व कोटपूतली-बहरोड़ को नवीन जिला बनाया गया, जबकि नव सृजित दोनों जिलों में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल स्थिति में हैं। हालांकि जानकारों का कहना है कि अभी नवीन जिलों की घोषणा हुई है, धीरे-धीरे स्वास्थ्य सेवाओं में भी विस्तार होगा।
खैरथल जिले की स्थिति:
स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर खैरथल में अभी सेटेलाइट अस्पताल संचालित है। इससे पहले यहां सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र संचालित था, जिसे हाल ही में क्रमोन्नत कर सेटेलाइट अस्पताल का दर्जा दिया गया। फिलहाल यहां सोनोग्राफी व चिकित्सा विशेषज्ञों की सेवाएं उपलब्ध नहीं हैं। हालांकि खैरथल जिले के अंतर्गत भिवाड़ी में हाल ही में उप जिला अस्पताल को क्रमोन्नत कर जिला अस्पताल बनाया गया है। इससे यहां सोनाग्राफी सहित कुछ स्वास्थ्य सेवाओं में कुछ हद तक विस्तार जरूर हुआ है, लेकिन अभी और भी सुविधाएं बढ़ाए जाने की दरकार है। इसी प्रकार तिजारा में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति बहुत ही दयनीय है। यहां का अस्पताल भवन भी काफी छोटा है। वहीं मेवात का ग्रामीण अंचल होने से तिजारा में प्रसव भी अधिक होते हैं, लेकिन इसके मुताबिक स्वास्थ्य सेवाएं बिल्कुल नगण्य हैं।
कोटपूतली-बहरोड़ जिले की स्थिति:
कोटपूतली-बहरोड़ जिले के अंतर्गत कोटपूतली व बहरोड़ दोनों जगह जिला अस्पताल संचालित है। इसमें कोटपूतली में इंडोर सेवाएं काफी बेहतर हैं, वहीं बहरोड़ के उप जिला अस्पताल को अभी हाल ही में क्रमोन्नत कर जिला अस्पताल का दर्जा दिया गया है। यहां सोनोग्राफी की सुविधा उपलब्ध है, लेकिन जिला अस्पताल के हिसाब से विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है।
बजट जल्द उपलब्ध कराया जाए:
नए जिलों में जनसंख्या के हिसाब से चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार की जरूरत है। इसके लिए अस्पताल भवन बनाने के लिए भूमि व बजट जल्द उपलब्ध कराया जाए। ताकि ट्रोमा सेंटर सहित सभी सुविधाएं विकसित हो सके। इसके साथ ही सभी बीमारियों के चिकित्सा विशेषज्ञों की सेवाएं भी उपलब्ध कराई जाए। अभी सीमित संसाधनों से आमजन को लाभान्वित करने के प्रयास कर रहे हैं।
- डॉ. श्रीराम शर्मा, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, अलवर।