अलवर

किसी जमाने में पानी से लबालब रहता था अलवर का यह बांध, अब लोगों ने अवैध कब्जे कर बना लिए मकान

अलवर में एक ओर चंबल लाने की बात हो रही है, दूसरी तरफ प्रशासन प्रेम रत्नाकर बांध में बसी अवैध कॉलोनियों पर कोई कार्रवाई नहीं कर पा रहा है।
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Jan 10, 2019
Encroachment On Prem Ratnakar Dam Of Alwar
किसी जमाने में पानी से लबालब रहता था अलवर का यह बांध, अब लोगों ने अवैध कब्जे कर बना लिए मकान

अलवर. हम इन चार अक्षरों के सामने और पीछे की तस्वीर से शहर की तासीर बताना चाह रहे हैं। मौके पर लिखे अलवर को सामने से देखने पर यह चमचमाती सडक़ मेट्रो शहरों जैसा आभास करा रही है, लेकिन पीछे प्रेम रत्नाकर बांध है, जिसमें अवैध निर्माण कर प्रकृति से बड़ा खिलवाड़ हो रहा है। यह निर्माण बदस्तूर जारी रहा तो एक दिन हजारों की जान खतरे में पड़ेगी। तब फिर इसी प्रशासन के हाथ-पैर फूल जाएंगे, जो आज इसे देखकर नजरअंदाज कर रहा है। फिर सरकार भी लाचार नजर आएगी।

प्रशासन मौन रहकर भू माफिया से प्रेम रत्नाकर बांध को पूरी तरह मिटाने का काम कर रहा है। तभी तो बांध की जमीन चिह्नित होने के बावजूद भी बांध के पेटे में अवैध निर्माण धड़ल्ले से हो रहा है। अवैध प्लॉटिंग कर मकान बनाए जा रहे हैं। एक के बाद अनेक जगहों पर बड़ी बड़ी चारदीवारी हो चुकी हैं। जबकि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश हैं कि बांध भराव की जमीन पर निर्माण करना तो दूर बहाव क्षेत्र में भी रुकावट नहीं डाल सकते। इसके बावजूद जिम्मेदार यूआईटी अधिकारियों को परवाह नहीं है। जब कभी वोटों की राजनीति होगी तब आमजन के बने बनाए मकानों में अड़ंगा डाला जाएगा। अभी जनता को इस बात के लिए सावचेत तक नहीं किया जा रहा है कि यह बांध भराव क्षेत्र है। जिसमें कभी भी मूसलधार बारिश हुई तो जान पर आफत आ सकती है।

करीब 130 हैक्टेयर बांध का क्षेत्र

सिंचाई भवन के पुराने रिकॉर्ड के अनुसार बांध भराव क्षेत्र करीब 130 हैक्टेयर जमीन पर है। अब मौके पर मुश्किल से 90 हैक्टेयर जगह ही खाली है। करीब 40 हैक्टेयर जमीन पर प्लॉटिंग हो चुकी है। भूखण्डों पर मकान बन गए। आए दिन कहीं न कहीं नया निर्माण हो रहा है। फिर भी कोई रोक नहीं रहा है। जबकि इस बांध में आसपास के पहाड़ों का पूरा पानी आती है। जिस दिन मूसलाधार बारिश होगी तब इन घरों में रह रहे लोगों की जान पर आफत सबसे पहले आएगी। उस दिन प्रशासन के हाथ पांव भी फूलना तय है।

पत्रिका ने कई बार चेताया

आमजन के हितों को देखते हुए पत्रिका ने बार-बार चेताया है। ताकि आम आदमी अपनी जीवन भर की कमाई पूंजी गलत जगह निवेश नहीं करे। इसके बावजूद प्रशासन कुछ दिन जागकर वापस सो जाता है। जिसका माफिया पूरा फायदा उठा रहा है।

दो बार सर्वे हो गया

यूआईटी, सिंचाई व राजस्व विभाग के जरिए बांध का करीब दो बार सर्वे हो चुका है। हाल के विधानसभा चुनावों से करीब तीन माह पहले भी बांध का टोटल सर्वे हुआ है। बांध भराव क्षेत्र के खसरा नम्बर चिंह्ति हुए हैं। लेकिन अब वापस प्रशासन सुस्त हो गया। फिर से माफिया ने जमीनें खरीद कर आमजन को भूखण्ड बेचना शुरू कर दिया है।

Published on:
10 Jan 2019 11:42 am