
अलवर. राजर्षि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय की लापरवाही के चलते राष्ट्र निर्माता शिक्षक तैयार करने वाले बीएड कॉलेज भारी अनियमितता कर रहे हैं। हालात यह है कि अलवर जिले के बीएड कॉलेजों में निर्धारित स्टाफ से कम स्टाफ रखा जा रहा है। इन कॉलेजों में संगीत व चित्रकला का शिक्षक होना आवश्यक है लेकिन अधिकतर बीएड कॉलेजों में यह नहीं है। कई कॉलेजों में शिक्षक तो काम नहीं कर रहे हैं लेकिन खानापूर्ति के लिए उनके प्रमाण पत्रों को रंगीन स्केन करके रखा गया है। अलवर जिले में बीएड कॉलेजों की संख्या 65 है।
अलवर जिले के उच्च शिक्षण संस्थानों में किस तरह हजारों लोगों को फर्जी तरीके से नौकरी करना दिखाया गया है। इसका जीता जागता उदाहरण अलवर जिले के बीएड कॉलेज हैं। पिछले दिनों यूजीसी ने अपनी रिपोर्ट में भी कहा था कि देश में करीब 80 हजार शिक्षक सिर्फ कागजों में काम कर रहे हैं। गैर सरकारी शिक्षण संस्थाओं में ऐसे शिक्षको के नाम रजिस्ट्रर में दर्ज है जो वहां काम भी नहीं कर रहे हैं। हालात यह है कि एक शिक्षक के प्रमाण पत्र कई- कई कॉलेजों ने लगा रखे हैं।
अलवर जिले के बीएड कॉलेजों में हालात यह है कि कई अन्य प्रदेश के युवाओं के प्रमाण पत्र रखकर यह कारोबार चलाया जा रहा है। नियमानुसार इन शिक्षकों के ओरिजनल प्रमाण पत्र विश्वविद्यालय में रखे जाते हैं लेकिन यहां भी शिक्षकों के रंगीन फोटो स्टेट के शैक्षिक प्रमाण पत्र रखे गए हैं।
नियमानुसार बीएड कॉलेजो में उच्च प्रशिक्षित शिक्षक रखना अनिवार्य है। इसके बावजूद ये बीएड कॉलेज उच्च योग्यताधारी को बहुत कम वेतन पर रखते हैं या उसका प्रमाण पत्र रखकर उसे प्रतिमाह कुछ राशि दे देते हैं। बीएड कॉलेजों को अपनी वेबसाइट पर सभी स्टॉफ का विवरण देना आवश्यक है लेकिन इन नियमों की पालना नहीं की नहीं जाती है। अधिकतर कॉलेजों की तो वेबसाइट तक नहीं है। विश्वविद्यालय ने अपने यहां रखे शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाण पत्रों की कभी गहनता से जांच तक नहीं की है।
अलवर जिले में यह हालात है कि एक संस्था में ही जहां दो या तीन कॉलेज चल रहे हैं, उनमें मात्र चार या पांच व्याख्याताओं से काम चलाया जा रहा है। यूजीसी के नियमानुसार विश्वविद्यालय को अपनी वेबसाइट पर प्राचार्य और प्रवक्ताओं के नाम डालने चाहिए। यदि विश्वविद्यालय इनके शैक्षिक प्रमाण पत्रों को आधार कार्ड से लिंक कर दें तो भारी अनियमितताएं सामने आ सकती हैं।