अलवर

मत्स्य विश्वविद्यालय की पहली ही भर्ती में फर्जीवाड़ा, लगे यह गंभीर आरोप, अब जांच शुरु

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Dec 18, 2018
Falsification in First Recruitment Of Matsya University Alwar
मत्स्य विश्वविद्यालय की पहली ही भर्ती में फर्जीवाड़ा, लगे यह गंभीर आरोप, अब जांच शुरु

अलवर. राजर्षि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय में पिछले दिनों हुई भर्ती में अनियमितताओं की उच्च स्तरीय जांच प्रारम्भ हो गई है। इस मामले में लोकायुक्त ने प्रकरण दर्ज कर विश्वविद्यालय से भर्ती में अनियमितताओं को लेकर स्पष्टीकरण मांगा है। जांच के दौरान दोनों पक्षों को सुना जाएगा।

अलवर में मत्स्य विश्वविद्यालय संघर्ष समिति की ओर से 27 नवम्बर 2018 को मत्स्य विवि में हुई भर्ती में अनियमितताओं की शिकायत लोकायुक्त में की थी। जिस पर लोकायुक्त में यह प्रकरण दर्ज कर लिया गया है जिसका नम्बर 6 (23)/ एलएएस/ 2018 है। इसका रिसीपट नम्बर 21999 है। यह मामला विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. भारत सिंह को पक्षकार बनाकर दर्ज कराया गया है। इस प्रकरण का स्टेटस लोकायुक्त कार्यालय की वेबसाइट पर ऑनलाइन देखा जा सकता है। मामले की शिकायत लोकायुक्त में समिति के संयोजक विष्णु चावड़ा ने की थी।
यह है तथ्य: राजर्षि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय ने कनिष्ठ लिपिक, स्टेनोग्राफर, निजी सहायक और सहायक कर्मचारी की भर्ती निकाली थी। लोकायुक्त के यहां दर्ज मामले में यह बताया है कि मत्स्य विश्वविद्यालय प्रशासन ने 28 व 29 जुलाई को एलडीसी व सहायक कर्मचारी के पदों की परीक्षा आयोजित की थी जिसकी आंसर- की 30 जुलाई को जारी कर दी गई। अभ्यर्थियों से आंसर की वाली आपत्ति के लिए मात्र एक ही दिन का समय दिया जबकि सभी भर्तियों में परीक्षा के बाद आपत्तियों के लिए न्यूनतम एक सप्ताह का समय दिया जाता है। इन परीक्षाओं का परिणाम 9 अगस्त 2018 को रात 9 बजे जारी किया गया। इसमें सबसे बड़ी बात यह है कि 10 अगस्त को सुबह 9 बजे ही चयनित अभ्यार्थियों को ज्वाइनिंग करा दी गई।

इस भर्ती पर सवाल उठाते हुए शिकायत में लिखा है कि चयनित अभ्यार्थियों को बिना पूर्ण कागजात ज्वाइनिंग कराने की विश्वविद्यालय को क्या मजबूरी थी, यदि उनके कागजात पूर्ण थे तो एक ही रात में पुलिस सत्यापन, मेडिकल प्रमाण पत्र, दहेज, संतान आदि सम्बन्धी प्रमाण- पत्र कैसे तैयार हुए। यदि ये प्रमाण पत्र नहीं थे तो ज्वाइन कराने में किस बात की जल्दबाजी थी।

भाई- भतीजावाद और मिलीभगत के भी आरोप

इस प्रकरण में दिए गए लिखित वाद में कहा है कि इस भर्ती में विश्वविद्यालय के अधिकारियों व प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत अधिकारी के परिचित बताए गए हैं जिससे सम्बन्धित सबूत भी लगाए गए हैं। मामले में चयनित अभ्यथियों को ज्वाइनिंग में भी अनियमितता बरतने का आरोप लगाया गया है।

खाली ओएमआर शीट पर बाद में गोले करने का आरोप

प्रकरण में आरोप लगाए गए हैं कि भर्ती में अधिकारियों अपने चेहतों की ओएमआर शीट खाली छोड़ दी जिसे बाद में भर देने का आरोप लगाया है।

Published on:
18 Dec 2018 10:21 am