मेवात और राठ क्षेत्र में नकदी फसल के रूप में किसान की पंसदीदा फसल नरमा-कपास
प्रदीप यादव
अलवर। सफेद सोना (कपास) के उत्पादन के लिहाज से अलवर जिला महत्वपूर्ण स्थान रखता है। अलवर जिले में सरसों के बाद मेवात और राठ क्षेत्र में नकदी फसल के रूप में किसान की पंसदीदा फसल नरमा-कपास है। खरीफ की फसल कपास से मेवात क्षेत्र के किसान निहाल हो रहे हैं। अच्छा मुनाफा मिलने के कारण किसान इस फसल को अधिक महत्व देते हैं। वर्ष 2021 में अनुमानित 48422 हैक्टेयर में कपास की फसल बोई गई है।
बीटी नरमे से उत्पादन में मिला फायदा:
पूर्व में किसान देशी और अमेरिकन कपास की खेती करता था, लेकिन उसमें कीटों के प्रकोप के कारण फसलों को नुकसान हो जाता था। नुकसान से बचने के लिए बड़ी कृषि कम्पनियों ने बीटी कॉटन ट्रांसजैनिक रूप से तैयार की, जिसमें रोग प्रतिरोधकता थोड़ी ज्यादा है, जिससे कीटों का प्रकोप न होने से किसानों का उत्पादन बढ़ा। ऐसे में किसान बीटी नरमे को तवज्जो दे रहे है। कृषि सांख्यिकी विभाग के एडी डॉ. अरविंद का कहना है कि पिछले दो दशक में मेवात के किसानों में नरमे की फसल को लेकर क्रेज बढा है।
नरमे के बाद कर सकते हैं गेहूं की बुवाई:
किसानों ने बताया कि नरमे की कटाई के तुरन्त बाद किसान अपने खेतों में रबी की फसल गेहूं की बुवाई कर सकता है।
अप्रेल-मई में की जाती है बुवाई:
झाबूवास, किशनगढ़बास निवासी किसान अब्दुल कलाम, का कहना है कि कपास की फसल की बुवाई अप्रेल व मई के माह में अक्टूबर-नवम्बर माह की तुड़ाई की जाती हैं। इस समय फसल में टिण्डे आए हुए हैं। अब्दुल ने बताया कि वह हर साल कपास की बुवाई करता है और इससे अच्छा मुनाफा मिल जाता है। कपास के भाव पांच हजार रुपए से ऊपर रहते हैं।
रोग के कारण कम उत्पादन की उम्मीद:
किशनगढ़बास के किसान निहाल यादव और गंंज किशनगढ़बास के जगदीश सैनी का कहना है कि कपास की फसल हर बार बोते हैं और उत्पादन अच्छा होने से मुनाफा भी अच्छा होता है। लेकिन इस बार बारिश के वजह से कपास के टिण्डे में गलन व झुलसा रोग लगने से उत्पादन की कम उम्मीद है।
कपास की बुवाई:
2018 63293 हैक्टेयर
2019 72404 हैक्टेयर
2020 63193 हैक्टेयर
2021 48422 अनुमानित
कपास का उत्पादन:
2018 23292 टन
2019 38292 टन
2020 30844 टन