वन्यजीवों की जमीनों पर कब्जों का खेल जारी है। डीम्ड फॉरेस्ट की जमीन का भूमाफिया खरीद-बेचान कर रहे हैं। अलवर में इन जमीनों पर कुछ जगहों पर होटल, रिसॉर्ट बन गए, तो कुछ जगहों पर जमीन का व्यावसायिक उपयोग करने की तैयारी है।
अलवर. वन्यजीवों की जमीनों पर कब्जों का खेल जारी है। डीम्ड फॉरेस्ट की जमीन का भूमाफिया खरीद-बेचान कर रहे हैं। अलवर में इन जमीनों पर कुछ जगहों पर होटल, रिसॉर्ट बन गए, तो कुछ जगहों पर जमीन का व्यावसायिक उपयोग करने की तैयारी है। ऐसे ही केस जयपुर में भी सामने आए हैं। वहां 150 बीघा ऐसी जमीन की खरीद-फरोख्त हो गई। रजिस्ट्री की तैयारी चल रही है। जिला प्रशासन अलवर का कहना है कि इस संबंध में कई मामले दर्ज किए हैं और कुछ पर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
इन जमीनों का संरक्षण जरूरी
कपूर कमेटी की रिपोर्ट के बाद सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी ने गैर मुमकिन पहाड़, रौंद, राड़ा, बीड़, बंजड़ बीड़ जमीन को डीम्ड फॉरेस्ट माना और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस जमीन की खरीद-फरोख्त पर रोक लगा दी। यानी यह जमीन डीम्ड फॉरेस्ट की होगी। यदि किसी प्रोजेक्ट में ऐसी जमीन चाहिए, तो उसके लिए वन विभाग से एनओसी लेना जरूरी थी, लेकिन अलवर में ऐसी जमीनों पर टहला, थानागाजी आदि एरिया में होटल, रिसॉर्ट बन गए। इसका खुलासा प्रशासन के सर्वे में हुआ है। एसडीएम, तहसीलदार कोर्ट तक मामले पहुंचे, लेकिन एक्शन नहीं लिया गया। वन विभाग से कुछ रिटायर्ड अधिकारी भी अपने रिसॉर्ट के लिए पहाड़ी एरिया में जमीन ले चुके हैं, जिन पर एक्शन लेना बाकी है।
आंधी तहसील में 150 बीघा जमीन की खरीद-फरोख्त, एनजीटी पहुंचा केस
जयपुर में बस्सी पड़ासोली, नाहरगढ़, झालाना, जमवारामगढ़, आंधी आदि जगहों पर डीम्ड फॉरेस्ट की भूमि है। हाल ही में बस्सी के पड़ासोली में भी करीब 150 बीघा जमीन डीम्ड फॉरेस्ट की बेच दी गई। रजिस्ट्री के लिए दस्तावेज तहसीलदार आंधी कार्यालय आए हैं। तहसीलदार प्रांजल कंवर का कहना है कि उन्होंने रजिस्ट्री नहीं की। इसे लेकर नाहरगढ़ वन एवं वन्यजीव संरक्षण समिति ने एनजीटी में भी केस दायर किया है। कहा है कि वन संरक्षण अधिनियम 1980 का खुला उल्लंघन हुआ है।