अलवर

पूर्व सीईओ के फर्जी हस्ताक्षर से जारी अनुभव प्रमाण पत्रों की जांच शुरू

कोरोना के बाद से उद्योग मजदूरों की कमी से जूझ रहे थे। जो मजदूर गांव गए, उनमें से ज्यादातर वापस नहीं लौटे। कैसे-जैसे काम पटरी पर आया तो अब सिलेंडर की किल्लत के चलते मजदूरों का पलायन फिर शुरू हो गया है।

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Mar 23, 2026

अलवर. कोरोना के बाद से उद्योग मजदूरों की कमी से जूझ रहे थे। जो मजदूर गांव गए, उनमें से ज्यादातर वापस नहीं लौटे। कैसे-जैसे काम पटरी पर आया तो अब सिलेंडर की किल्लत के चलते मजदूरों का पलायन फिर शुरू हो गया है। भिवाड़ी, नीमराणा, बहरोड़, साेतानाला, शाहपुर, घीलोठ व आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों से करीब 50 हजार मजदूर गांवों का पलायन कर चुके हैं। भिवाड़ी इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल एसोसिएशन की ओर से मजदूरों को पांच किलो एलपीजी सिलेंडर उपलब्ध करवाएं जा रहे हैं। इसके बाद कई मजदूर रुकने को तैयार नहीं हैं। यहां उत्तर प्रदेश और बिहार के प्रवासी श्रमिक काम करते हैं।

मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के कारण गैस आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसके चलते दिल्ली, अहमदाबाद, सूरत, मुंबई जैसे शहरों में प्रवासी मजदूर पहले ही अपने घरों पर लौटना शुरू कर चुके थे। अब छोटे शहरों में पलायन शुरू हो गया है। ऐसे में आने वाले दिनों में उद्योगों के समक्ष उत्पादन का संकट खड़ा हो जाएगा। भिवाड़ी के करीब 1500 उद्योगों से 20 हजार से ज्यादा मजदूर गांवों का रुख कर चुके हैं। यहां की सभी इकाईयों में कहीं न कहीं गैस का उपयोग होता है।

नीमराणा-बहरोड़ में 30 हजार से ज्यादा मजदूरों का पलायन

नीमराणा, बहरोड़, साेतानाला, शाहपुर, घीलोठ व आसपास औद्योगिक क्षेत्रों में करीब एक हजार से ज्यादा औद्योगिक इकाईयां हैं। इनमें करीब 2.85 लाख मजदूर कार्यरत हैं। इनमें से करीब 30 हजार मजदूरों ने गैस किल्लत के चलते गांवों की तरफ पलायन कर लिया है।

एमआइए में भी हालात अच्छे नहीं

अलवर के मत्स्य औद्योगिक क्षेत्र में भी हालात अच्छे नहीं हैं। खनन के बंद होने के बाद कई इकाईयां पहले ही यहां से शिफ्ट हो चुकी हैं। अब सिलेंडर आधारित कई इकाईयों में भी उत्पादन कम हो चुका है। अभी पलायन की बात से उद्योगपति इनकार कर रहे हैं, लेकिन आने वाले दिनों में पलायन को रोकना मुश्किल हो जाएगा।

गैस की किल्लत से मजदूरों का पलायन शुरू हो गया है। ऐसे में जो मजदूर बचे हैं, उनसे ही काम करवाया जा रहा है। आने वाले दिनों में भी हालात नहीं सुधरे तो पलायन और ज्यादा तेज होगा।-कृष्ण गोपाल कौशिक, अध्यक्ष, नीमराणा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन

मजदूरों ने पलायन शुरू कर दिया है। हमने वैकल्पिक तौर पर उन्हें पांच किलो के एलपीजी सिलेंडर उपलब्ध करवाएं हैं, लेकिन वे फिर भी अपने गांवों की तरफ चल पड़े हैं। -प्रवीण लाम्बा, अध्यक्ष, भिवाड़ी इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल एसोसिएशन

अभी पलायन जैसी स्थिति नहीं बनी है, लेकिन उत्पादन पर सीधा प्रभाव पड़ा है। गैस आधारित उद्योगों को ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। -मनोज गुप्ता, अध्यक्ष, मत्स्य इंडस्ट्रियल एरिया

Published on:
23 Mar 2026 04:46 pm
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