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पूर्व सीईओ के फर्जी हस्ताक्षर से जारी अनुभव प्रमाण पत्रों की जांच शुरू

जिला परिषद के पूर्व सीईओ बनवारी लाल रमन के फर्जी हस्ताक्षर से जारी अनुभव प्रमाण पत्रों के मामले की जांच अरावली विहार पुलिस ने शुरू कर दी है।

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अलवर

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Umesh Sharma

Mar 23, 2026

अलवर. जिला परिषद के पूर्व सीईओ बनवारी लाल रमन के फर्जी हस्ताक्षर से जारी अनुभव प्रमाण पत्रों के मामले की जांच अरावली विहार पुलिस ने शुरू कर दी है। पुलिस ने पूर्व सीईओ समेत चार कार्मिकों के हस्ताक्षर के नमूने लेकर फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) भेजे हैं।
लिपिक भर्ती-2022 के तहत सीमा गुर्जर का चयन हुआ था। जांच में उसका अनुभव प्रमाण पत्र फर्जी मिला था, तो उन्हें बर्खास्त कर दिया गया और जिला परिषद सीईओ सालुखे गौरव रविंद्र ने नवंबर-2025 में अरावली विहार थाने में केस दर्ज कराया था। आरोप थे कि पूर्व सीईओ बनवारी लाल रमन के फर्जी हस्ताक्षर से अनुभव प्रमाण पत्र जारी किया गया है। अनुभव प्रमाण पत्र की एक कॉपी कार्यालय पत्रावली में संलग्न करने सहित डिस्पैच रजिस्टर में कांट-छांट की गई है। इस मामले को पुलिस ने पहले हल्के में लिया, लेकिन जयपुर पुलिस की ओर से एक मामले की जांच की गई, तो अरावली विहार पुलिस ने जांच तेज की और अब पूर्व सीईओ समेत जिला परिषद की भर्ती शाखा व इससे जुड़े कार्मिकों के हस्ताक्षर के नमूने जांच के लिए हैं।
पूछताछ के लिए बुलाए कार्मिकों की बढ़ सकती है परेशानी
जयपुर एसओजी (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) ने बनीपार्क थाने में भी एक केस दर्ज कराया था, जिसमें पूर्व सीईओ बनवारी लाल रमन के फर्जी हस्ताक्षर कर अनुभव प्रमाण पत्र जारी करने व तत्कालीन सीईओ कनिष्क कटारिया के हस्ताक्षर से फर्जी सत्यापन रिपोर्ट तैयार करने के आरोप थे। इस मामले में बनीपार्क थाना पुलिस ने जयपुर में तैनात रहे लिपिक जगदीश को गिरफ्तार किया था। लिपिक नीलम कोर्ट से अग्रिम जमानत पर चल रही हैं। बनीपार्क थाना पुलिस की एक टीम पिछले दिनों अलवर जिला परिषद आई थी और उसके बाद परिषद के चार लिपिकों को पूछताछ के लिए बुलाया था। अब इस मामले में पूछताछ के लिए बुलाए गए कार्मिकों की परेशान बढ़ सकती है।
इस पर ‘कुंडली’ मारे बैठी पुलिस
फर्जी भर्तियों को लेकर एसीओजी की तरफ से अगस्त-2023 में अरावली विहार थाने में केस दर्ज कराया गया था। शिक्षक कमल सिंह, लिपिक रुकमणी नंदन शर्मा व दो अन्य लोगों पर रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इस मामले में तीन साल हो गए, लेकिन अरावली विहार पुलिस जांच को आगे नहीं बढ़ा रही, जबकि सरकार फर्जी भर्तियों को लेकर आए दिन कार्रवाई कर रही है। इस मामले में लिपिक रुकमणी की आपत्ति भी फर्जी पाई गई है। उसका नाम रजिस्टर में दर्ज है, लेकिन अनुमोदित 286 लोगों की सूची में नहीं है।

एफएसएल जांच में ये होंगे खुलासे
-अनुभव प्रमाण पत्र किसने जारी किए और उस पर हस्ताक्षर किसके हैं
-किसने इसे भर्ती शाखा के डिस्पैच रजिस्टर से डिस्पैच किया
-कैसे इस जाली दस्तावेज की कॉपी ऑफिस पत्रावली में संलग्न हुई