अलवर

सरकार ने यहां खोल दिए महाविद्यालय लेकिन ना व्याख्याता है ना भवन

राज्य सरकार ने महाविद्यालय तो खोल दिए लेकिन न व्याख्याता लगाए, न भवन दिया।
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Jul 11, 2018
Kishangarhbas and mundawar government college condition
सरकार ने यहां खोल दिए महाविद्यालय लेकिन ना व्याख्याता है ना भवन

अलवर. अलवर जिले मे लोकसभा उप चुनावों के समय किशनगढ़बास और मुंडावर के कॉलेज विद्यार्थियों के साथ छलावा साबित हो रहे हैं। इन महाविद्यालयों में कार्यवाहक प्राचार्य और व्याख्याता लगाए हैं। हालात यह हैं कि तबादला होकर आए व्याख्याता यहां कार्यभार ग्रहण करने को ही तैयार नहीं है। कॉलेज में सरकार ने एक भी मंत्रालयिक कर्मचारी नहीं लगाए हैं। इन महाविद्यालयों के पास न तो ढंग का भवन हैं और न ही आवश्यक सुविधाएं। इन सभी के चलते नए कॉलेजों के प्रति विद्याथियों का रुझान नहीं है जिसके कारण स्नातक प्रथम वर्ष में बहुत कम संख्या में आवेदन पत्र आए हैं।

अलवर जिले के मुंडावर और किशनगढ़बास में राजकीय महाविद्यालय खोलने की अनुमति दी गई। इस नए शिक्षा -सत्र में इन महाविद्यालयों में आवेदन भरवाए गए हैं। कॉलेज शिक्षा निदेशालय की ओर से सभी महाविद्यालयों में 7 जुलाई से शिक्षण कार्य प्रारम्भ होने के निर्देश दिए गए हैं। इन दोनों कॉलेजों मे वर्तमान हालात किसी अच्छे स्कूल से भी बदतर हैं जिसके कारण यहां फिलहाल कॉलेज चलाना मुश्किल सा है।

बासकृपाल नगर और मुंडावर दोनों में कार्यवाहक प्राचार्य लगाए गए हैं जो यहां बहुत ही कम आते हैं। मुंडावर में चार व्याख्याता भी लगाए गए हैं जिनमें से एक व्याख्याता ने ही ज्वाइन किया है। इन दोनों कॉलेजों में 6-6 व्याख्याताओं के पद हैं। बास कृपालनगर में चार व्याख्याता तबादला होकर आए थे लेकिन यहां केवल एक ने ही ज्वाइन किया है। इन महाविद्यालयों को संचालित करने वाले मंत्रालयिक कर्मचारियों के पद पर तो किसी को भी नहीं लगाया है। यानि इनमें इनके पद ही सृजित नहीं किए हैं।

संसाधन तक नहीं

दोनों नए कॉलेजों में स्थिति बहुत खराब है। मुंडावर में कॉलेज के लिए जमीन आवंटित हो गई है लेकिन यह कॉलेज पुराने प्राइमरी स्कूल के भवन में चल रहा है। किशनगढ़बास का कॉलेज बास कृपाल नगर राजकीय सीनियर माध्यमिक विद्यालय के परिसर में चल रहा है। कॉलेज यहां के 7 कमरों में संचालित हो रहा है। मुंडावर के प्राथमिक विद्यालय में कॉलेज चलाया जाएगा जिसमें आवश्यक संसाधन तक नहीं है।

युवाओं का रुझान नहीं

दोनों महाविद्यालयों में आवश्क संसाधन नहीं होने के कारण यहां प्रवेश को लेकर युवाओं का रुझान नहीं है। इसके कारण यहां कई पद रिक्त रह गए हैं जिन पर ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया दुबारा से प्रारम्भ हो गई है। मुंडावर मे 160 सीटों पर मात्र 426 आवेदन ही आए। इसके लिए 290 की वरीयता सूची निकाली गई जिनमें से 160 ने ही फीस जमा कराई इनमें से 149 का प्रवेश हो पाया।
यहां एसटी के 10 और अति पिछड़ा वर्ग की 1 सीट खाली है। बासकृपाल नगर महाविद्यालय में एससी की 9 सीटे, एसटी की 19 सीटें और ओबीसी की एक सीट खाली रह गई। यहां कुल 30 सीटें खाली हैं।

कैसे बनेगा पढ़ाई का माहौल

दोनों राजकीय महाविद्यालयों में आवश्यक मानवीय और भौतिक संसाधन तक नहीं है। इसके कारण इन कॉलेजों में पढ़ाई का माहौल नही बन सकेगा। यह नाममात्र का कॉलेज बनने के लिए तैयार हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कॉलेज के नाम पर छलावा है।

Published on:
11 Jul 2018 04:09 pm