अलवर

कोरोना ठीक हो गया, फिर परेशान लोग

कोविड के पोस्ट पॉजिटिव आने वाले मरीजों की संख्या अलवर जिले में भी बढ़ती जा रही है जिसके चलते एक बार कोराना ठीक होने के बाद भी मरीजों को सावधानी बरतने की आवश्यकता है। कई मरीज एेसे हैं जिन्हें पहले कोविड होने पर भी उनमें लक्षण कम आए थे लेकिन अब उन्हें कोविड खूब परेशान कर रहा है। अलवर जिले में कई एेसे मरीजों को चिह्नित किया गया है जिन्हें इस बीमारी से दुबारा परेशानी हो रही है।

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Nov 26, 2020
कोरोना ठीक हो गया, फिर परेशान लोग

कोविड के पोस्ट पॉजिटिव आने वाले मरीजों की संख्या अलवर जिले में भी बढ़ती जा रही है जिसके चलते एक बार कोराना ठीक होने के बाद भी मरीजों को सावधानी बरतने की आवश्यकता है। कई मरीज एेसे हैं जिन्हें पहले कोविड होने पर भी उनमें लक्षण कम आए थे लेकिन अब उन्हें कोविड खूब परेशान कर रहा है। अलवर जिले में कई एेसे मरीजों को चिह्नित किया गया है जिन्हें इस बीमारी से दुबारा परेशानी हो रही है।

प्रारम्भ में मरीजों का कहा गया था कि एक बार कोविड सही होने के बाद ये तीन माह तक दुबारा नहीं आता है लेकिन अलवर जिले में कई एेसे मरीज सामने आए हैं जिन्हें दुबारा से कोविड हो गया है, इन्हें कोविड पोस्ट पॉजिटिव हो गया है।राजकीय सामान्य चिकित्सासल के चेस्ट रोग विशेषज्ञ डॉ. विष्णु अग्रवाल का कहना है कोविड-19 से ठीक होने के बाद हमारे पास कई मरीज़ आ रहे हैं. उन्हें थकान, साँस लेने में परेशानी, चक्कर आना और बेहोशी जैसे समस्याएँ हो रही है. कई लोगों में स्वाद का ना आना और गले में खऱायर की दिक्कत भी बनी रहती है। कई मरीज एेसे आए हैं जिन्हें जांच में दुबारा ही कोविड के लक्षण मिले हैं। इनको कोविड पहले से अधिक परेशान कर रहा है।

चिकित्सक डॉ. विष्णु गोयल का कहना है कि जिनमें कोविड का संक्रमण जितना अधिक होता है, उतने अधिक लक्षण उसमें ठीक होने के बाद देखने को मिलते हैं। कुछ लोगों में कोविड-19 के संक्रमण के कारण एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम (एआरडीएस) हो जाता है यानी फेफड़े ठीक से काम नहीं करते, उनमें पल्मनरी फ़ाइब्रोसिस की समस्या हो सकती है। पल्मनरी फ़ाइब्रोसिस में फेफड़ों की ऑक्सीजन लेने की क्षमता कम हो जाती है। ऐसे मरीज़ों को सांस फूलने की परेशानी लंबे समय तक रह सकती है। ज़्यादा गंभीर स्थिति में घर में ऑक्सीजन भी लेनी पड़ सकती है। उनके फेफड़े कमज़ोर हो जाते हैं और आगे भी किसी अन्य संक्रमण की चपेट में आ सकते हैं. इन्हें लंबे समय के लिए अपना इलाज कराना पड़ेगा। वायरस से लडऩे के लिए शरीर में बने एंटीजन इम्यून सिस्टम में इस तरह के बदलाव कर देते हैं, जिससे इम्यून सिस्टम अति प्रतिक्रिया करने लगता है। इसी कारण बुखार, बदन दर्द और अन्य समस्याएं होने लगती हैं। शरीर में इनफ्लेमेट्री रिएक्शन होने लगता है जो पूरे शरीर पर प्रभाव डालता है। ऐसे में वायरस ख़त्म होने के बाद भी इनफ्लेमेट्री सेल्स और केमिकल बने रहते हैं। इम्यून सिस्टम की इस प्रतिक्रिया के कारण ही लक्षण बने रहते हैं। कोरोना वायरस ठीक होने के बाद के लक्षण ठीक होने में हफ़्तों से लेकर दो से छह महीने भी लग सकते हैं.

Published on:
26 Nov 2020 09:39 am
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