जिले की अर्थव्यवस्था की रीढ़ सरसों के बीज कुछ कंपनियों के हाथों में हैं। बीज निर्माता कंपनियों ने इस साल फिर बीज के भाव बढ़ा दिए हैं। सरसों के बीज महंगे होने का खमियाजा उन किसानों को उठाना पड़ रहा है जिन्हें इस बार सरसों के भाव पिछले साल की तुलना में कम मिले।
सरसों बीज की कीमतों में बढ़ोतरी, किसान परेशान
- सरसों के बीज के भावों में मनमर्जी
अलवर. जिले की अर्थव्यवस्था की रीढ़ सरसों के बीज कुछ कंपनियों के हाथों में हैं। बीज निर्माता कंपनियों ने इस साल फिर बीज के भाव बढ़ा दिए हैं। सरसों के बीज महंगे होने का खमियाजा उन किसानों को उठाना पड़ रहा है जिन्हें इस बार सरसों के भाव पिछले साल की तुलना में कम मिले।
इस साल सरसों की बुवाई शुरू होने वाली है जो अक्टूबर माह में भी चलेगी। सरसों के बीज के भाव इस समय एक हजार रुपए प्रति किलो चल रहे हैं जबकि यह भाव पिछले साल 850 से 900 रुपए प्रति किलो थे। बीते साल सरसों के भाव 9 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक हो गए थे लेकिन इस बार सरसों के भाव कम रहे। इस बार सरसों बीज महंगी कीमत में बिक रहे हैं।
जिले में 40 करोड़ का बिकता है बीज-
अलवर जिले में सरसों की पैदावार के लिए 400 टन बीज की आवश्यकता होती है जिसमें विदेशी कंपनी का बीज ही एकाधिकार रखता है। जिले में 40 करोड़ का सरसों बीज बिकता है। सरसों के बीजों की कीमतों पर कृषि विभाग का नियंत्रण नहीं है।
नामी कंपनियां विदेशी-
वर्तमान में बीज बेचने वाली 21 कंपनियों में से 18 विदेशी कंपनियां हैं। इनमें थाइलैंड, जर्मनी, स्विटरजलैंड की हैं, जबकि बिक्री में भारतीय कंपनी का स्थान सातवां है।
सरसों के विदेशी कंपनियों के बीज लोकप्रिय-
भारत में विदेशी कंपनियों के सरसों बीजों की बिक्री खूब होती है। एक दशक के दौरान देश में विदेशी कंपनियों के बीजों का चलन बढ़ा है जिसका कारण इनकी मार्केटिंग और गुणवत्ता है।
सरसों पकने का समय-
कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि पूसा सरसों- 25 नाम की किस्म 100 दिन में तैयार हो जाती है। एक हैक्टेयर में पूसा सरसों- 25 की बुवाई कर 14.5 क्विंटल पैदावार प्राप्त की जा सकती है। इसके अलावा एक और किस्म है, पूसा सरसों- 27 है जिसे पकने में 110-115 दिन का समय लगता है और प्रति हेक्टेयर 15.5 क्विंटल तक पैदावार मिल जाती है।
सरसों की बुवाई का समय-
सरसों की बुवाई के लिए उपयुक्त तापमान 25 से 26 डिग्री सेल्सियस तक रहता है। अलवर जिले में सरसों की बुवाई सितंबर के तीसरे सप्ताह से पूरे अक्टूबर माह में होगी।
भावों पर हमारा नियंत्रण नहीं-
हाइब्रिड सरसों के भाव कंपनियां स्वयं तय करती हैं। हम तो यह जांच कर सकते हैं कि एमआरपी से अधिक पर तो नहीं बेचा जा रहा है।
- के. एल. मीणा, सहायक निदेशक, कृषि विभाग, अलवर।
कृषि खाद और बीज की दुकानों का किया आकस्मिक निरीक्षण, मिली अनियमितताएं
अलवर. कृषि विभाग के उच्चाधिकारियों ने शनिवार को जिले के कई स्थानों पर खाद व बीज की दुकानों का आकस्मिक निरीक्षण किया, जिसमें कई अनियमितताएं मिली।
शनिवार को इस दल ने ढिगावाड़ा में बालाजी खाद व बीज भंडार, किसान सेवा केन्द्र, मालाखेड़ा में किसान व खाद बीज, योगेश खाद व बीज भंडार उमरैण तथा यादव खाद बीज भंडार उमरैण का निरीक्षण किया तो खाद के रिकार्ड संधारण में कई कमियां मिली जिसके चलते इन्हें नोटिस जारी किए गए। इस दल में सहायक निदेशक राजेश गुप्ता, भगवान सिंह यादव तथा स्थानीय अधिकारी के.एल. मीणा थे। इसी प्रकार किशनगढ़बास और बहरोड़ में भी अनियमितताएं मिली हैं।