राजस्थान के अलवर जिले में इन दिनों रसोई गैस यानी एलपीजी की किल्लत ने आम जनता की मुश्किलों को बढ़ा दिया है। एक ओर जहां जिला प्रशासन की ओर से गैस की पर्याप्त आपूर्ति के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर हकीकत इसके उलट नजर आ रही है।
राजस्थान के अलवर जिले में इन दिनों रसोई गैस यानी एलपीजी की किल्लत ने आम जनता की मुश्किलों को बढ़ा दिया है। एक ओर जहां जिला प्रशासन की ओर से गैस की पर्याप्त आपूर्ति के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर हकीकत इसके उलट नजर आ रही है। जिले की तमाम गैस एजेंसियों पर उपभोक्ताओं की भारी भीड़ उमड़ रही है और लोगों को घंटों लाइन में लगकर अपने नंबर का इंतजार करना पड़ रहा है।
अलवर शहर सहित ग्रामीण इलाकों में एलपीजी गैस सिलेंडर की किल्लत से गृहणियों का बजट और रसोई का सुकून दोनों बिगड़ गए हैं। कई उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्होंने सात से दस दिन पहले ही सिलेंडर की बुकिंग करा दी थी, लेकिन इसके बावजूद अब तक उन्हें गैस की डिलीवरी नहीं मिल पाई है। डिलीवरी में हो रही इस देरी के कारण लोग सीधे गैस गोदामों और एजेंसियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। गौरतलब है कि जिले में कमर्शियल गैस सिलेंडर की आपूर्ति तो सुचारू रूप से की जा रही है, लेकिन घरेलू गैस के लिए हाहाकार मचा हुआ है।
गैस सप्लाई में हो रही देरी की खबरों ने जनता के बीच एक डर का माहौल पैदा कर दिया है। इस स्थिति को रसद विभाग के अधिकारी पैनिक बुकिंग का नाम दे रहे हैं। लोग इस डर में हैं कि आने वाले समय में गैस मिलना और भी मुश्किल हो सकता है, इसलिए जिनके पास अतिरिक्त खाली सिलेंडर रखे हैं, वे भी उन्हें अभी से भर कर स्टॉक करने की कोशिश कर रहे हैं। इस वजह से अचानक बाजार में गैस की डिमांड सामान्य से कहीं अधिक बढ़ गई है, जिसे पूरा करने में सिस्टम को पसीने आ रहे हैं।
गैस आपूर्ति को लेकर बढ़ते जनाक्रोश और शिकायतों के समाधान के लिए जिला प्रशासन ने अब कमर कस ली है। प्रशासन की ओर से जिला स्तर पर एक विशेष कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। यदि किसी उपभोक्ता को सिलेंडर मिलने में परेशानी हो रही है या एजेंसी संचालक मनमानी कर रहा है, तो वे सीधे कंट्रोल रूम के नंबर 0144-2338000 पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके अलावा, किसी भी तरह की आपातकालीन स्थिति या कालाबाजारी की सूचना के लिए पुलिस कंट्रोल रूम के नंबर 112 पर भी संपर्क किया जा सकता है। जिला रसद विभाग का कहना है कि आपूर्ति को सामान्य करने के प्रयास किए जा रहे हैं और उपभोक्ताओं को घबराने की आवश्यकता नहीं है।