अलवर

एक कमरे में खोल दिया महात्मा गांधी अंग्रेजी विद्यालय, कैसे होंगे नौनिहाल अंग्रेजी शिक्षा में निहाल

रामगढ उपखण्ड के पहाडी बास का सरकारी स्कूल में न स्वयं का भवन है और न ही पर्याप्त संसाधन। इसके बावजूद चुनावी साल में इसे महात्मा गांधी अंग्रेजी विद्यालय का दर्जा दे दिया गया। ऐसे में सवाल उठता है कि बगैर भवन और संसाधन के यह विद्यालय किस प्रकार नौनिहालों को अंग्रेजी शिक्षा में निहाल कर पाएगा।
2 min read
Feb 07, 2024
Mahatma Gandhi English School opened in one room, how children will enjoy English education
बगैर भवन और संसाधन के यह विद्यालय

नौगांवा. रामगढ उपखण्ड के पहाडी बास का सरकारी स्कूल में न स्वयं का भवन है और न ही पर्याप्त संसाधन। इसके बावजूद चुनावी साल में इसे महात्मा गांधी अंग्रेजी विद्यालय का दर्जा दे दिया गया। ऐसे में सवाल उठता है कि बगैर भवन और संसाधन के यह विद्यालय किस प्रकार नौनिहालों को अंग्रेजी शिक्षा में निहाल कर पाएगा।

पहाडी बास का यह स्कूल तो महज एक उदाहरण है। प्रदेश व अलवर जिले में ऐसे कई दर्जनों स्कूल होंगे, जिन्हें चुनावी साल के दौरान बांटी गई रेवडियों के तहत कोई संसाधन न होने के बावजूद वहां के जनप्रतिनिधियों ने महात्मा गांधी स्कूल में तब्दील करवा दिया।

विद्यालय का नामांकन महज 30, एक कमरे में 5 कक्षाएं

विद्यालय के लिए किसी प्रकार का भवन नहीं है। गांव वालों ने ही एक कमरा बगैर किराए के तब तक उपलब्ध कराया हुआ है, जब तक विद्यालय का भवन नहीं बन जाता। इस कमरे की स्थिति भी खास अच्छी नहीं है। नामांकन के नाम पर विद्यालय की 5 कक्षाओं में महज 30 बच्चों का नामांकन है, वो भी कभी-कभार ही पूरी संख्या में आते हैं। बच्चों की शिक्षा के लिए 2 संविदा कर्मी की नियुक्ति की गई है, वहीं 3 शिक्षक अभी हाल ही में महात्मा गांधी स्कूलों में अन्य जिलों से पदस्थापन के दौरान लगाए गए हैं। अंग्रेमी माध्यम होने से पूर्व भी इस विद्यालय में कोई शिक्षक नियुक्त नहीं था। पीईईओ क्षेत्र से प्रतिनियुक्ति पर शिक्षक की व्यवस्था की गई थी।

उधारी के सामान से चला रहे काम

विद्यालय में अभी किसी प्रकार बजट नहीं है। ऐसे में बच्चों को पढाने के लिए ब्लैक बोर्ड, बच्चों के बैठने के लिए फर्श, हाजरी व अन्य कार्यो के लिए रजिस्टर सहित अन्य सामान पीईईओ विद्यालय बहाला से उपलब्ध कराया गया है। इसके अलावा कुछ सामान ग्रामीणों की तरफ से दिया हुआ है। पेयजल के लिए गांव की सार्वजनिक टंकी पर निर्भर है।

कई बार अवगत कराया

पहाडी बास प्राथमिक स्कूल में संसाधनों का अभाव है। गांव वालों की तरफ से दिए गए एक कमरे में विद्यालय चल रहा है। इसके लिए प्रशासन सहित शिक्षा विभाग के अधिकारियों को कई बार लिखा है।

कल्लू खां सरपंच बहाला।

संसाधनों का अभाव

राज्य सरकार ने अंतिम दौर में ऐसे विद्यालयों को महात्मा गांधी में तब्दील कर दिया, जिनमें संसाधनों का अभाव था। अब आगामी दिनों में अगर प्रदेश सरकार या विभाग ऐसे विद्यालयों की सूचना मांगता है, जहां संसाधनों का अभाव है तो उन्हें ये उपलब्ध कराई जाएगी।

रामेश्वर दयाल मीणा सीडीईओ, अलवर।

Published on:
07 Feb 2024 04:37 pm