गोविंदगढ़ कस्बे के एक मैरिज होम में शुक्रवार को महिला किसान एवं आजीविका सखी अनुभव आदान-प्रदान कार्यशाला का आयोजन किया गया।
गोविंदगढ़ कस्बे के एक मैरिज होम में शुक्रवार को महिला किसान एवं आजीविका सखी अनुभव आदान-प्रदान कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में बड़ी संख्या में महिला किसानों ने भाग लेकर खेती से जुड़े अपने अनुभव साझा किए और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को खेती में नवाचार और तकनीकी उपयोग के प्रति प्रोत्साहित करना रहा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि तहसीलदार बसंत कुमार परसोया ने कहा कि खेत की मेड़ों से लेकर बाजार तक अब महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। आज की महिला किसान केवल खेत संभालने तक सीमित नहीं है, बल्कि नई तकनीकों के जरिए खेती को अधिक लाभकारी बना रही है। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में पानी की कमी एक गंभीर चुनौती है, इसलिए किसानों को पानी की बचत करने वाली तकनीकों को अपनाना चाहिए।
उन्होंने ड्रिप सिंचाई प्रणाली के उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि इससे कम पानी में भी बेहतर उत्पादन लिया जा सकता है। साथ ही गेहूं, सरसों और चना जैसी पारंपरिक फसलों के साथ ऐसी फसलों की खेती पर भी ध्यान देने की सलाह दी, जो कम क्षेत्र में अधिक उत्पादन देकर बेहतर आय दे सकें।
तहसीलदार ने ऑर्गेनिक खाद, देसी खाद और केंचुआ खाद के उपयोग को बढ़ावा देने तथा रासायनिक उर्वरकों, विशेषकर यूरिया के कम प्रयोग की सलाह दी। कार्यशाला में नायब तहसीलदार आर.के. यादव, पटवारी सुखविंदर सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।