
अलवर के राजर्षि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय की अकादमिक परिषद की बैठक में परीक्षा और पाठ्यक्रम को लेकर अहम फैसले लिए गए। परिषद ने परीक्षाओं में पूछे जाने वाले बहुविकल्पीय प्रश्नों को हटाकर परीक्षा पैटर्न बदलने का निर्णय लिया। वहीं, नए पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए बोर्ड ऑफ स्टडीज (बीओएस) के सदस्यों को 10 दिन का समय दिया गया है। बैठक में 19 जून को हुई अकादमिक परिषद की बैठक के कार्यवाही विवरण की पुष्टि की गई। परिषद ने सदस्यों को जॉब ओरिएंटेड और स्किल ओरिएंटेड पाठ्यक्रम तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य पाठ्यक्रम को विद्यार्थियों के रोजगार और कौशल विकास से जोड़ना है। बैठक में पाठ्यक्रमों को वर्तमान जरूरतों के अनुरूप तैयार करने पर जोर दिया गया। सभी सदस्यों को रोजगारपरक और कौशल आधारित पाठ्यक्रम विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं।
बैठक में पांच विषयों का सिलेबस प्राप्त हो चुका है। शेष विषयों के पाठ्यक्रम अभी तैयार नहीं हुए हैं। इनके लिए बीओएस सदस्यों को नया सिलेबस तैयार करने के लिए 10 दिन का समय दिया गया है। तय अवधि में सिलेबस तैयार नहीं होने पर राजस्थान विश्वविद्यालय का सिलेबस मान्य किया जाएगा। इससे पाठ्यक्रम तैयार करने में देरी के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी।
अकादमिक परिषद ने विश्वविद्यालय में राजस्थानी भाषा अध्ययन केंद्र स्थापित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है। केंद्र शुरू करने के लिए जल्द विस्तृत रूपरेखा तैयार की जाएगी। इसके अलावा दीनदयाल उपाध्याय शोध पीठ स्थापित करने का प्रस्ताव भी परिषद ने पारित कर दिया। शोध पीठ के संचालन और इसकी जिम्मेदारी किसे सौंपी जाएगी, इसका निर्णय अभी नहीं हुआ है। गौरतलब है कि पाठ्यक्रम में बदलाव को लेकर लंबे समय से मांग उठ रही थी। अकादमिक परिषद की बैठक में कुछ सदस्यों ने इसका मुद्दा उठाया और सर्वसम्मति से यह बदलाव करने का निर्णय किया गया है।
कुलपति आरके दवे, रजिस्ट्रार हेमराज परीड़वाल, डॉ. लता शर्मा, कर्मवीर सिंह, विशेष आमंत्रित सदस्य डॉ. गंगाश्याम गुर्जर, डॉ. बाबूलाल खटिक, डॉ. ऋतु गुप्ता, डॉ. महेंद्र आर्य, डॉ. यू.ए. फारूकी, डॉ. अर्पिता चौधरी, डॉ. सत्यवान आर्य, डॉ. अंजू बाला गुप्ता, डॉ. कल्पना सोनी, डॉ. राजेश यादव, डॉ. अनिता सोनी, डॉ. सी.पी. पालीवाल और डॉ. जयराम बैरवा मौजूद रहे।