
कहावत है कि ठोकर खाकर ही ठाकुर बना जाता है, यानि जीवन में ठोकरे खाकर बहुत कुछ सीखा जाता है। लेकिन लगता है कि अलवर का मत्स्य विश्वविद्यालय इस मुहावरे के बिल्कुल विपरीत चल रहा है। ठोकरे खाने के बाद भी सीख लेने को तैयार नहीं है।
राजस्थान विश्वविद्यालय सहित देश के अन्य विश्वविद्यालयों में सभी परीक्षाओं के परिणाम आ चुके हैं। इसके साथ ही आगामी सत्र के लिए परीक्षा आवेदन भरना शुरू हो गए हैं। लेकिन मत्स्य यूनिवर्सिटी के अभी तक परिणाम ही नहीं आए हैं। यदि ऐसे ही हालात रहे तो पिछले साल की तरह ही इस बार भी परीक्षा में देरी हो सकती है। मत्स्य विश्वविद्यालय के हालात यह है कि यहां मुख्य परीक्षाओं के परिणाम ही आज तक घोषित नहीं किए गए हैं। जैसे बीए प्रथम वर्ष, बीएससी प्रथम वर्ष , स्नातकोत्तर परीक्षा के अधिकतर परीणाम भी अभी आने बाकी है। जिन परीक्षाओं के परिणाम आ चुके हैं उनके पुनमुल्यांकन के फार्म भी अभी तक नहीं भरवाए गए हैं। बीएससी, बीकॉम के ही पुर्नमुल्यांकन के फार्म भरवाए गए हैं। शेष परीक्षाओं के अभी तक नहीं भर पाएं हैं। जबकि परिणाम दो माह पूर्व ही चुका है। साथ ही पुरक परीक्षाओं के आवेदन भी अभी तक नहीं भरवाए गए हैं। गत वर्ष की जिन परीक्षाओं के परिणाम आए हैं उनकी मार्कशीट अभी तक नहीं आई है।
एलएलबी प्रथम व द्वितीय वर्ष के परिणाम आए हुए हैं एक माह हो गया है। लेकिन पुनर्मुल्यांकन के आवेदन आज तक नहीं भरवाए गए हैं। 15 दिन पहले एलएलबी तृतीय वर्ष का परिणाम आया है। लेकिन ड्यू परीक्षा के आवेदन अभी तक नहीं भरवाए गए हैं। गत वर्ष भी अलवर जिले के अधिकांश छात्रों ने मत्स्य विश्वविद्यालय की लेट लतीफी के चलते राजस्थान विश्वविद्यालय से आवेदन भरे थे। ऐसी स्थिति में विद्यार्थी को समझ नहीं आ रहा है कि वो अब क्या करें। यदि ये ही हालात रहे तो मत्स्य विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को अब राजस्थान विश्वविद्यालय की शरण लेनी पडेग़ी।
ये बोले छात्र
गुंडगाव निवासी कपिल ने बताया कि वो अलवर से एलएलबी सैंकड इयर कर रहा है। पिछले महिने में कई चक्कर लगा चुका है लेकिन अभी तक यह पता नहीं चल पा रहा है कि पुनर्मुल्यांकन के फार्म कब भरे जाएंगे। इसी प्रकार से अलवर निवासी मांगेलाल शर्मा ने बताया कि वह मत्स्य विश्वविद्यालय से एलएलबी प्रथम वर्ष का छात्र है। पुनर्मूल्यांकन करवाना है, लेकिन अभी तक फार्म नहीं आए हैं।