
बाल अपराधों की रोकथाम और कार्रवाई के लिए पुलिस थानों में स्थापित बाल डेस्क कागजों में सिमटकर रह गई है। रेकॉर्ड में तो बाल डेस्क चल रही है, लेकिन धरातल पर बाल डेस्क की कोई गतिविधि नजर नहीं आ रही है। ऐसे में सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं का आमजन को लाभ नहीं मिल पा रहा है।
पुलिस मुख्यालय के आदेश के बाद प्रदेश के सभी पुलिस थानों में बाल डेस्क स्थापित की गई। जिस पर बाकायदा पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। बाल डेस्क का काम थानों में बाल अपराध से सम्बन्धित प्रकरणों में पूछताछ व कार्रवाई करना तय किया गया। साथ ही बाल डेस्क पर नियुक्त पुलिसकर्मियों को अपने थाना क्षेत्र के स्कूलों में जाकर बच्चों को बालकों के प्रति जागरुक करने का जिम्मा सौंपा गया। जिससे कि बाल अपराधों में कमी लाई जा सके, लेकिन पुलिसकर्मियों की ओर से स्कूलों में जाकर बच्चों को बाल अपराधों के प्रति जागरुक नहीं किया जा रहा है।
थानों में उपयोगिता नजर नहीं आ रही
पुलिस थानों में आने वाले बाल अपराध के सम्बन्धित प्रकरणों में पूछताछ व कार्रवाई में बाल डेस्क की उपयोगिता नजर नहीं आ रही है। रेकॉर्ड में बाल डेस्क पर नियुक्त पुलिसकर्मियों से अन्य काम कराए जा रहे हैं। वहीं, बाल अपराध के प्रकरणों अन्य ही पुलिसकर्मी पूछताछ व कार्रवाई कर रहे हैं।
जिले के सभी पुलिस थानों को बाल डेस्क के प्रभावी तरीके से कार्य करने के लिए निर्देशित किया जाएगा। इस सम्बन्ध में हाल ही में अलवर आए बाल आयोग के सदस्यों से भी चर्चा की गई थी।
- राजीव पचार, एसपी अलवर।